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होली के मन भावन गीतों से सरोबार हुए नगर से गांव तक

Mon, 21 Mar 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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होल्यार - फोटो : amar ujala
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  पूरा जिला होली के मस्तीभरे गीतों से सराबोर हो गया है। ढोल-नगाड़ों और मजीरों की मन मोहक थाप से होल्यारों के दल सुबह से ही घरों से निकल जा रहे हैं। चमेली के नौ-दस फूल माली ने हार गूंथों...गीत पर होल्यार थिरकरने को मजबूर हो गए।
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नगर के विभिन्न हिस्सों में खड़ी होली के गीतों का गायन जोरों पर है। होल्यारों ने एक बढ़चढ़कर एक होली के गीतों का गायन किया। उधर ग्राम पंचायत कपकोट के होल्यार ढोल-नगाड़ों के साथ आंणू स्थित अखाड़े में जमा हुए। यहां उन्होंने होली के गीत गाए। इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर वह होली के गीतों के गायन के लिए घर-घर गए। वहां जर्नादन जोशी, बसंत बल्लभ जोशी, सभासद गिरीश जोशी गिर्दा, चंद्र सिंह कपकोटी, प्रेम सिंह, दीवान सिंह, नारायण कपकोटी, चंद्रशेखर जोशी, दिनेश जोशी, कै. हरीश कपकोटी, राम सिंह बिष्ट आदि थे।

उधर नगर पंचायत के तिरूवाण में होल्यारों ने अंबा के भवन..., श्यामा आज हमारी लाज धरो..., श्रवण ही यम तीर के यो जल भर लायो...समेत अनेक मनभावन गीतों का गायन किया। वहां भाजयुमो के नगर अध्यक्ष तनुज तिरूवा, किशन तिरूवा, प्रेम राम तिरूवा, गणेश चंद्र, दीवान राम अमित, हरीश, प्रकाश, रोहित, दीपक, जीवन, कमल, राम सिंह, खुशहाल, जमुना प्रसाद आदि थे। उधर, ऐठाण, पोथिंग, उतरौड़ा, बैड़ा, असों और फरसाली आदि क्षेत्रों में मस्ती भरी  होली के गीतों का गायन जोरों पर है। 
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महिला होल्यार पुरुषों से नहीं पीछे 
 होली के मस्ती भरे गीतों के गायन में महिलाएं भी पुरुषों से पीछे नहीं हैं। महिलाओं ने अपने गीतों की शुरुआत आज बिरज में होरी रे रसिया..., कान्हा की बांसुरी रंग से भरी....इत हो रही जै जैकार... समेत कई मनभावन गीतों का गायन किया। होल्यारों के खाने के लिए विभिन्न किस्म के मिष्ठान के साथ ही चाय, आलू के गुटके और गुजिया दिए जा रहे हैं।
बच्चों में दिख रहा गजब का उत्साह
 रंगों का पर्व होली को लेकर बच्चों में भी गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे गले मे ढोलक डालकर होलिकोत्सव का खूब मजा ले रहे हैं। नगर पंचायत कपकोट के आंणू निवासी नवीन जोशी का चार वर्षीय जयदीप जोशी सुबह ही गले में ढोलक डालकर मनभावन नृत्य करता है। इसके बाद वह अपने दादा बसंत बल्लभ जोशी के साथ होली के गीतों के गायन को घर घर निकल जाता है वहां भी वह ढोल नगाड़ों पर मनमोहक थाप देता। 
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