घांघली के प्रधान सिकंदर अली का परिवार होली के रंग में
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तीज त्योहारों पर छोटी-छोटी बातों पर धर्म-संप्रदाय की दुहाई देकर बवाल करने वालों को घांघली गांव के सिकंदर अली के कुनबे से सबक लेना चाहिए। यह कुनबा रंगों के त्योहार होली को भी ठीक उसी तरह मनाता आ रहा है जैसे ईद और ईदमिलादुन्नबी को।
हिंदू परिवारों की तरह यह कुनबा भी फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी को बाकायदा कोट मंदिर में जाता है और होली के दिन रंगों से सराबोर भी रहता है। गरुड़ ब्लॉक के पहले मुस्लिम प्रधान सिकंदर अली का परिवार 86 वर्षों से होली का त्योहार मना रहा है।
अली का परिवार घांघली गांव में 1932 से रहता है। इस वक्त गांव में सिकंदर अली सहित छह मुस्लिम परिवार निवास करते हैं। सिकंदर के अनुसार उनके कुनबे के सभी लोग होली का जश्न हिंदू परिवारों की तरह ही मना रहे हैं।
हिंदू परिवार भी उनके घर होली खेलने आते हैं। उनके त्योहारों पर हिंदू परिवार भी उनके साथ खुशी बांटते हैं। होली की चतुर्दशी के दिन उनके कुनबे के लोग गांव के होल्यारों के संग गाजे-बाजे के साथ कोट भ्रामरी मंदिर पहुंचते हैं।
कुनबा होल्यारों संग देवी दर्शन के बाद मंदिर परिसर में होली गायन करता है। सिकंदर ने बताया कि होली के टीके के दिन वर्षों से उनके घर पर होली का हलवा बनता आ रहा है। सिकंदर का कहना है कि होली के अलावा वह दीपावली, घुघतिया, दशहरा पर्व भी धूमधाम से मनाते हैं।
उनका कहना है कि होली भाईचारे को बढ़ावा देने और मिलन का पर्व है। वैसे भी, त्योहार तो त्योहार हैं इनमें हिंदू-मुसलिम-सिख ईसाई का भेदभाव नहीं होना चाहिए।