बागेश्वर/गरुड़। जिले में होली का पर्व उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिले के ग्रामीण अंचलों में खड़ी होली गायन की धूम है। पुरुष होल्यारों की टोली घर-घर जाकर होली गीत गाकर परंपरा का निर्वहन कर रही है। बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी पर होली का खुमार छाया है।
जिला मुख्यालय के आदर्श कॉलोनी में होल्यार घर-घर जाकर होली गायन कर रहे हैं। समीपवर्ती गांव द्यांगण, खोली, काकड़ा, आरे से लेकर चामी, बिजोरी, भयेड़ी, सात-रतबे, जौलकांडे, मनकोट, खुनौली समेत तमाम गांवों में होली गायन की गूंज है। सुबह 11 बजे से शाम के पांच बजे तक होल्यार होली गायन कर रहे हैं। इस दौरान जल कैसे भरूं यमुना गहरी...., कहां के तुम ग्वाल गुजरिया...., जेठानी देवर तुम्हारो ना बोलै.. समेत कई अन्य होली गीतों का गायन किया जा रहा है। गरुड़ के सिल्ली, मटेना, पाये, गढ़खेत समेत ग्रामीण अंचलों में भी खड़ी होली गायन उत्साह से किया जा रहा है। सफेद कुर्ते और पायजामे और टोपी पर बिखेरे गए तरह-तरह के रंग वाले परिधान पहने होल्यार सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
कांडा, कपकोट, काफलीगैर में भी होली का उत्साह
कांडा/कपकोट। कांडा, कपकोट और काफलीगैर तहसील क्षेत्र में भी होली का पर्व उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कांडा के कांडे कन्याल, नाग कन्याल, सखोला, नारायणगूंठ, ठांगा, पोखरी समेत अन्य गांवों में होली गायन हो रहा है। कपकोट, ऐठाण, बमसेरा समेत आसपास के तमाम गांवों में होली गायन किया जा रहा है। काफलीगैर तहसील क्षेत्र के खरही मंडल, धूराफाट और रीठागाड़ के गांवों में भी सुबह से शाम तक पुरुषों की खड़ी होली के स्वर गुंजायमान हैं।