बैजनाथ में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल हुई क्षति
- फोटो : अमर उजाला
ओलावृष्टि और अंधड़ से कत्यूर घाटी में कटने को तैयार रबी की फसल को भारी क्षति पहुंची है। घाटी के काश्तकारों और किसान क्लब देवनाई घाटी ने ऐलान किया है कि क्षति का मुआवजा काश्तकारों को समय नहीं दिया गया तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
शुक्रवार की देर सांय कत्यूर घाटी के देवनाई घाटी, लाहुर, गोमती और पंचगढ़ी घाटी, लौबांज, भिलकोट, तिलसारी न्याय पंचायत के गांवों में ओलावृष्टि और अंधड़ से खेतों में पकने को तैयार रबी की फसल को भारी क्षति पहुंची है। आधे घंटे तक हुई ओलावृष्टि और अंधड़ से गेहूं और फलदार पेड़ों को भारी क्षति पहुंची है। ओलावृष्टि से आम के पेड़ों पर आया बौर भी गिर गया है। फूलवाड़ी गूंठ, बैजनाथ, मेलाडुंगरी, देवनाई घाटी और भिलकोट न्याय पंचायत में फसलों को ज्यादा क्षति पहुंची है।
किसान क्लब देवनाई घाटी के अध्यक्ष सुंदर बरोलिया, बैजनाथ की प्रधान अनीता गोस्वामी, मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत भंडारी, गढसेर के प्रधान नवीन ममगई, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता ने बताया कि ओले और अंधड़ से पचास फीसदी फसल नष्ट हो गई है। किसान क्लब के अध्यक्ष ने बताया कि दो साल बाद कत्यूर और देवनाई घाटी में गेहूं की फसल अच्छी हुई थी। ब्लॉक कृषि प्रभारी धनी राम आर्या ने बताया कि ओलावृष्टि और अंधड़ से फसल और बागानों को क्षति पहुंची है। विभागीय कर्मचारी अपने स्तर से क्षति का मूल्यांकन कर रहे है। क्षति की रिपोर्ट शीघ्र विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट ने राजस्व विभाग से ओलावृष्टि और अंधड़ से हुई क्षति का तत्काल आकलन करने को कहा है।