बागेश्वर। मौसम में धीरे-धीरे ठंडक बढ़ने लगी है। बढ़ती ठंड के साथ फेफड़ों से संबंधित रोग और गठिया के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगती है। फेफड़ों से संबंधित बीमारियों से ग्रसित मरीजों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, कफ बनना और मामूली श्रम करने में सांस फूलने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। वहीं, गठिया से जूझ रहे मरीजों का जोड़ो में दर्द और जकड़न के चलते चलने-फिरने में समस्या होती है। एहतियात बरतकर इन समस्याओं से कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. चंद्र मोहन सिंह भैसोड़ा ने बताया कि ठंड बढ़ने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीपीओडी) जैसी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की परेशानी बढ़ने लगती है। अस्पताल में मरीज सांस फूलने, छाती में दर्द, जकड़न, कफ बनना, खांसी, चक्कर आना आदि समस्या लेकर पहुंचते हैं। अस्पताल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जनार्दन पांगती ने बताया कि ठंड में गठिया के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। आराम पाने के लिए मरीज घरेलू या बाहरी दवाओं का सेवन करने लगते हैं। जो समस्या को और बढ़ा सकता है।
अस्थमा से बचाव-
-सुबह और शाम को सैर से बचना चाहिए,
-घर से बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने चाहिए
-गर्म पानी के साथ हल्का भोजन करना चाहिए,
- इनहेलर अपने पास रखना चाहिए
-छाती में कफ जमा होने पर राहत के लिए गर्म पानी या नेबुलाइजर से भाप लेना चाहिए
गठिया से बचाव
-गर्म कपड़े पहनें
-जोड़ों में गति और लचीलापन बनाए रखने के लिए घर पर ही हल्का- फुल्का व्यायाम करें
-दर्द को कम करने के लिए हीट थैरेपी का प्रयोग करें
-डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें