कपकोट के जगथाना में बच्चों को तापमान मापते चिकित्सक। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। कपकोट ब्लॉक के चचई जगथाना गांव में गलघोंटू (डिप्थीरिया) रोग को हल्के में लेने से चचई और जगथाना गांव में मासूमों को जान से हाथ धोना पड़ा। पांच दिन में दो मौतों के बाद जागे स्वास्थ्य महकमे ने लगातार दूसरे दिन क्षेत्र के गांवों में टीकाकरण किया।
चचई गांव में शुक्रवार को गले के रोग से पीड़ित एक 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई थी। पिछले सोमवार को चचई के पड़ोसी गांव जगथाना के एक बालक की मौत हो गई थी। जगथाना के बालक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकार किया था कि इलाके में गलघोंटू रोग फैला है। उससे पहले गलघोंटू रोग फैलने की पुष्टि भी स्वास्थ्य महकमा नहीं कर रहा था। इसलिए स्वास्थ्य महकमे ने ऐहतियात के तौर पर कोई कदम नहीं उठाए। स्वास्थ्य महकमे ने शुक्रवार को मरी किशोरी के सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजने की जानकारी दी है। जांच के बाद ही मृत्यु का कारण स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. पीएस जंगपांगी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रविवार को जगथाना में 109 बच्चों को डिप्थीरिया की रोकथाम के लिए टीके लगाए गए। डॉ. जंगपांगी ने बताया कि गांव में 22 लोगों का बुखार का इलाज किया गया। जगथाना के उडियार तोक में भी शिविर लगाकर 29 बच्चों को टीके लगाए। 13 लोगों के बुखार की जांच की गई। पुड़कुनी और चलकाना में भी टीके लगाए गए। शनिवार को चचई और कन्यालीकोट में टीके लगाए थे।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। चचई, जगथाना के साथ ही आसपास के गांवों में लोगों को टीके लगा दिए गए हैं। अब और लोग रोग की चपेट में नहीं आएंगे। यदि किसी में डिप्थीरिया के कोई लक्षण मिले तो सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे।
- डॉ. पीएस जंगपांगी, डिप्टी सीएमओ बागेश्वर।