बागेश्वर। जल जीवन मिशन के तहत कार्य कर रहे ठेकेदारों ने विभागीय निविदा दरों के पुनर्मूल्यांकन के लिए धरना दिया। कर्मचारियों ने विभाग को नई दरें मिलने के बावजूद पुरानी दरों से निविदा कराने पर नाराजगी जताई। जल्द नई दरों से निविदा कराने और पहले चरण में हुए कार्य के बकाया बिलों का भुगतान जल्द कराने की मांग की।
ठेकेदारों ने जल संस्थान कार्यालय में धरना देकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि बाजार में निर्माण सामग्री महंगी होती जा रही है, इसके बावजूद विभाग निविदा दरों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर रहा है। कहा कि ठेकेदारों को पाइप और अन्य सामान स्वयं के खर्चे से लाना पड़ रहा है, जबकि जल निगम ने 25 प्रतिशत राशि का भुगतान रोका है।
वहीं जल संस्थान ठेकेदारों का 25 प्रतिशत से अलावा भी पांच प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान काट रहा है। अनुबंध करते समय विभाग की ओर से सामग्री की 10 प्रतिशत जमानत राशि ली जा रही है, जबकि अन्य विभागों में यह प्रावधान नहीं है। वहीं पाइप परीक्षण के नाम पर चार हजार रुपये प्रति पाइप और 18 प्रतिशत की जीएसटी राशि मांगी जा रही है।
उन्होंने जबरन काटे जा रहे पांच प्रतिशत अनुदान को तत्काल ठेकेदारों को वापस करने की मांग की। ग्राम पंचायत अधिकारी को समिति से हटाने और पाइप परीक्षण विभाग के खर्च पर कराने की मांग की। इसके लिए ज्ञापन भी दिया गया। इनमें नंदन सिंह बोरा, पान सिंह कोरंगा, दिवाकर जोशी, किशन सिंह कठायत, प्रवीण मेहता, गिरीश पाठक, महेश परिहार, हेम प्रकाश टंगड़िया आदि रहे।