बागेश्वर। हिमालयी क्षेत्र से सटे गांवों के लोगों को चार साल से घर के पास प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल रही है। इसके लिए अब उन्हें 70 किमी दूर जिला मुख्यालय या 45 किमी दूर कपकोट नहीं आना पड़ रहा है।
हंस फाउंडेशन अगस्त 2019 से हिमालय की तलहटी खाती गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का संचालन कर रहा है। धूर और बदियाकोट में फाउंडेशन ने उप स्वास्थ्य केंद्र खोले हैं। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर, आयुष डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन के साथ ही नर्स भी कार्यरत हैं। लोगों को अस्पताल में प्रसव के साथ ही कई तरह की जांचों की सुविधा मिल रही है। अस्पताल का सारा खर्च, स्टाफ का वेतन आदि का खर्च फाउंडेशन उठाता है। सरकार से इस साल दिसंबर तक अस्पताल संचालन का अनुबंध है। फाउंडेशन के अस्पताल संचालन से पहले खाती गांव में स्वास्थ्य विभाग की एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसएडी) संचालित होती थी। फाउंडेशन से लोगों को राहत मिल रही है। इन गांवों के कई लोग हंस फाउंडेशन के मुरीद हैं।
धूर गांव में हंस फाउंडेशन के अस्पताल से लोगों को काफी सुविधा मिल रही है। मामूली बीमारियों के लिए लोगों को दूर नहीं जाना पड़ रहा है। - देबुली देवी निवासी धूर (सोराग)
हिमालयी क्षेत्र के दुर्गम गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना सराहनीय है। घर के नजदीक लोगों की स्वास्थ्य देखभाल हो रही है। - खिलाफ सिंह निवासी दऊ (वाछम)
स्थानीय लोगों को मामूली बीमारियों के लिए 70 किमी दूर बागेश्वर, 45 किमी दूर कपकोट जाना पड़ता था। अब घर के नजदीक इलाज मिल रहा है। - बलवंत सिंह दानू, मल्ला गांव।
खाती के अस्पताल में महिलाओं को प्रसव तक की सुविधा मिल रही है। इससे दुर्गम गांवों की गर्भवती महिलाओं को बहुत ही राहत मिली है। - दमयंती देव, शिक्षिका जूहा सोराग।