बागेश्वर। अंग्रेजी काल में बने वास्तुकला के बेजोड़ नमूने बागेश्वर की प्रमुख धरोहरों में से एक ऐतिहासिक झूलापुल पर दो महीने से भी अधिक समय से आवाजाही बाधित है। संभावित खतरे को देखते हुए डीएम ने झूलापुल से आवाजाही पर रोक लगाई है।
बीते 19 जुलाई को डीएम अनुराधा पाल ने झूलापुल के लिए खतरा बताते हुए आवागमन पर रोक लगाने के निर्देश नगरपालिका के ईओ को जारी किए थे। डीएम ने झूलापुल की मरम्मत कराने की बात कही थी। शासन को इसकी रिपोर्ट भी भेजी।
अब तक झूलापुल की मरम्मत के लिए प्रशासन और सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। झूलापुल से आवाजाही बंद होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों को दुग बाजार से कत्यूर बाजार, गुरुद्वारा गली में आने के लिए काफी लंबा फेरा लगाना पड़ रहा है। संवाद
व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ रहा असर
बागेश्वर। झूलापुल से आवाजाही बंद होने का कत्यूर बाजार और गुरुद्वारा गली के बाजार पर विपरीत असर पड़ा है। व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं। झूलापुल पर आवाजाही होने के दौरान लोग दुग बाजार, नुमाइशखेत क्षेत्र से सीधे कत्यूर बाजार आ जाते थे। कत्यूर बाजार, गुरुद्वारा गली के बाजार लोगों की आवाजाही से गुलजार रहते थे, लेकिन झूलापुल पर आवाजाही न होने से कत्यूर बाजार और गुरुद्वारा गली के व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
डीएम अनुराधा पाल का कहना है कि लोनिवि और एनएच डिवीजन ने झूलापुल के डिजाइन की ड्राइंग उपलब्ध न होने से मरम्मत करने में असमर्थता जताई है। शासन को झूलापुल के विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराने के लिए पूर्व में पत्र भेजा था। एक बार फिर शासन को पत्र भेजा है।