सरयू और गोमती नदियों से धड़ल्ले से खनन हो रहा है। अवैध खनन के कारण जहां एक ओर भू-कटाव का खतरा बना हुआ है, वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद खनन पर रोक लगाने के प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए हैं।
सरयू और गोमती नदियों का पर्यावरणीय ही नहीं बल्कि धार्मिक महत्व भी है। इसके बावजूद इस नदी में धड़ल्ले से खनन चल रहा है। इन नदियों से सुबह से ही रेता निकालने का काम शुरू हो जाता है। नदी से मनमर्जी से रेत खोदने और पत्थर निकालने के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। सरयू और गोमती नदी बरसात में उफान पर रहती हैं।
इन नदियों के कारण बरसात में जबरदस्त भू कटाव होता है। नदियों से सुरक्षा के लिए कई आबादी वाले स्थानों में तट बंध या सुरक्षा दीवारें नहीं बनाई गई हैं। ऐसे में यदि इसी तरह से अवैध खनन चलता रहा तो भविष्य में भू-कटाव का और अधिक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। नदी में खनन पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से पूर्व में छापामारी अभियान चलाया गया था लेकिन वर्तमान में कार्रवाई नहीं होने से धड़ल्ले से खनन हो रहा है।