एकीकृत अजीविका सहयोग परियोजना के तहत द गोट ट्रस्ट लखनऊ के सहयोग से गरुड़ ब्लॉक में बकरी पालन के क्षेत्र में काम कर रही संजीवनी और लाहुुरघाटी आजीविका सहकारिताओं से संबद्ध 20 पशु सखियों को बकरी पालन, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य रक्षा पर दिया जा रहा पांच दिवसीय क्षमता विकास प्रशिक्षण का समापन हो गया है।
परियोजना प्रबंधक धीरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि बकरी पालन आय का जरिया बनेगा। यहां एक होटल में एकीकृत अजीविका सहयोग परियोजना के प्रबंधक पांडेय ने कहा कि परियोजना के सहयोग से गठित बकरी पालक समूहों को पशुधन प्रबंधक और पशु सखी के माध्यम से पशु प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाएगा। जिससे गरीबों की आर्थिक हालत में सुधार आएगा। कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए राज्य के कालसी और गरुड़ ब्लॉक को चयनित किया गया है। कार्यक्रम के क्रियान्वयन और प्रबंधन के लिए गोट ट्रस्ट लखनऊ के साथ परियोजना द्वारा दो साल का अनुबंध किया गया है।
जिसके तहत आजीविका संघों के 600 गरीब परिवारों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बकरी पालन व्यवसाय को प्राथमिकता दी है। संदर्भ व्यक्ति पशु पालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डा. पीके पाठक ने प्रतिभागियों को बकरी पालन, बकरियों में होने वाले रोगों के लक्षण और उनके उपचार के बारे में बताया।
विभागीय स्तर पर बकरी पालकों को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यशाला में पशु सखियों को बकरियों के रोग, चोट और उपचार किट के बारे में जानकारी दी गई। लखनऊ के स्टेट कोआर्डिनेटर मानिक चौधरी, तकनीकी विशेषज्ञ भीष्म सिंह, पशुधन प्रबंधक दीपक कुमार, निशा रावत ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर परियोजना के सहायक वीरेंद्र गुसाईं, काम सिंह फर्स्वाण, कार्तिक रावत आदि मौजूद थे।