बागेश्वर। नगर के बागनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। शिवरात्रि के इस पावन मौके पर जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर सतराली की होली पारंपरिक अंदाज में भगवान बागनाथ के दरबार पहुंची। ढोल-दमाऊ की थाप की गूंज के बीच होल्यारों ने मंदिर परिसर को फागुन के रंगों से सराबोर कर दिया।
महाशिवरात्रि पर रविवार सुबह से ही बागनाथ मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। इसी बीच सतराली क्षेत्र से आए होल्यारों की टोली जब मंदिर पहुंची तो पूरा परिसर शिव शंकर भोले और जय बागनाथ के जयकारों के साथ होली के गीतों से गुंजायमान हो उठा। सतराली की होली की यह परंपरा दशकों पुरानी है जहां महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ के चरणों में अबीर-गुलाल अर्पित कर होली का विधिवत आगाज किया जाता है। होल्यारों ने जब बागनाथ मंदिर के प्रांगण में होली गायन शुरू किया तो वहां मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। शास्त्रीय और खड़ी होली के रागों ने ऐसा समा बांधा कि श्रद्धालु झूम उठे। होल्यारों ने एक दूसरे को अबीर का टीका लगाकर क्षेत्र की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की। सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन, होली खेले गिरजापति नंदन... के साथ होली गायन की शुरूआत हुई। युवाओं और बुजुर्गों ने आपसी समन्वय से होली गायन किया। होल्यारों ने हां जी शंभू तुम क्यों ने खेले होली लाला होली गाकर भगवान शिव की स्तुति की।
सात गांवों के ढोलक वादकों और होल्यारों में दिखा बेहतरीन तालमेल
बागनाथ मंदिर में होली गायन के दौरान सात गांवों के ढोलक वादकों और होल्यारों में बेहतरीन तालमेल दिखा। होल्यारों ने पूरी रंगत के साथ पारंपरिक होली का गायन किया। मंदिर परिसर में चल रही होली में नगरवासी भी शामिल होकर होली गायन का लुत्फ उठाने लगे। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि सौहार्दपूूर्ण वातावरण में सतराली के होल्यारों के साथ स्थानीय लोगों ने भी होली गायन किया।
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पूर्वजों के समय से बागनाथ मंदिर से खड़ी होली की शुरूआत करने का चलन है। पुरखों की परंपरा और खड़ी होली गायन की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रवासी सामूहिक प्रयास कर रहे हैं। -हेम चंद्र लोहनी, होल्यार
खड़ी होली गायन हमारी विरासत है। बागनाथ मंदिर में होली गायन के दौरान बागेश्वर के लोगों का अच्छा सहयोग रहता है। महाशिवरात्रि पर मंदिर के दर्शन का भी मौका मिल जाता है। -ललित मोहन कांडपाल, होल्यार
बागनाथ मंदिर में होली गायन की परंपरा पुरखों के जमाने से चली आ रही है। परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र के युवा भी सहयोग कर रहे हैं। युवाओं के उत्साह के साथ होली गायन की परंपरा आज भी उसी तरह चली आ रही है। -भुवन चंद्र लाेहनी, होल्यार,
बागनाथ जी का आशीर्वाद है कि आज हम फिर उनके आंगन में खड़े हैं। हमारी टोली दशकों से इसी तरह यहां आती रही है। सतराली की होली का पहला गुलाल जब तक महादेव के चरणों में नहीं चढ़ता, हमारा उत्सव शुरू नहीं होता। यह हमारी पीढ़ियों का संकल्प है। -राजेश लोहनी, ग्राम प्रधान लोहाना
बागनाथ जी का आशीर्वाद है कि आज हम फिर उनके आंगन में खड़े हैं। हमारी टोली दशकों से इसी तरह यहां आती रही है। सतराली की होली का पहला गुलाल जब तक महादेव के चरणों में नहीं चढ़ता, हमारा उत्सव शुरू नहीं होता। यह हमारी पीढ़ियों का संकल्प है। -राजेश लोहनी, ग्राम प्रधान लोहाना