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लॉकडाउन में हेम और विनोद ने किया कुमाऊंनी-गढ़वाली बालगीतों का संकलन

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हेम पंत और विनोद सिंह गढ़िया द्वारा तैयार की गई बालगीतों की ई बुक। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। अपने पहाड़ के संस्कृृति संरक्षण के प्रति सजग युवाओं ने लॉकडाउन का उपयोग कर कुमाऊं और गढ़वाल के बालगीतों का संकलन तैयार किया है। बाल चित्रों से सुसज्जित घुघुति बासूती नामक बालगीतों का यह संकलन अपनी बोली, भाषा, परंपराओं के प्रति उदासीन हो रहे पहाड़ के जनमानस को अपनी बोली-भाषा के प्रति भी आकर्षित करेगा।
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ग्राम भड़कटिया (पिथौरागढ़) निवासी रुद्रपुर की निजी कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हेम पंत और ग्राम पोथिंग (कपकोट-बागेश्वर) निवासी नोएडा की निजी कंपनी के एकाउंट ऑफिसर विनोद सिंह गढ़िया ने लॉकडाउन की शुरुआत में घुघुति बासूती ई बुक भाग एक तैयार की। इसमें कुमाऊंनी बालगीतों का संकलन किया गया। इस संकलन को लोगों ने खूब सराहा। इसलिए अब हेम पंत और विनोद गढ़िया ने घुघुति बासूती भाग दो ई बुक तैयार की है। इसमें गढ़वाली बालगीतों का संकलन है।
भाग एक में हल्लोरि बाला हल्लोरि, तेरी ईजू पालड़ी घास जै रैछ, घास काटि ल्याली, फिरि दुद्दू पिलालि। (बच्चे को लोरी सुनाते हुए गाया जाता है। तेरी मां घास काटने गई है। घास काटकर लाएगी, फिर दूध पिलाएगी)। बालगीत संग्रह में पर्व गीत फूलदेई, घुघुतिया त्योहार के गीतों के साथ ही कीट-पतंगों से संबंधित गीत धनपुतलि धान दे, आ आ चड़ि तेरे काटेंगे कानबरखा दीदी इथैकै आ आदि का संकलन किया गया है। भाग दो में गढ़वाली लोरी, पर्वगीत, कीट-पतंगों से संबंधित गीतों का संकलन किया गया है, जो अब विलुप्ति के कगार पर हैं।
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हेम संकलन, विनोद डिजाइन, बच्चे बनाते बालचित्र
बागेश्वर। हेम पंत ने विभिन्न स्रोतों से बालगीतों का संकलन करते हैं। विनोद गढ़िया डिजाइन करते हैं। हेम पंत की पुत्री वसुधा, पुत्र वत्सल, विनोद गढ़िया की पुत्री मीनाक्षी बालचित्र बनाते हैं। उम्मीद है कि इनका संग्रह पहाड़ के बालगीतों की परंपरा को पुनर्जीवित करने में अहम योगदान देगा।
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