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बिन पानी हो रही बुवाई, काश्तकारों में रोष

Tue, 31 May 2016 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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सूखी नहर - फोटो : amar ujala
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सरकार कृषि को नए आयाम देने और उपज बढ़ाने के लिए वैैज्ञानिक आधार को अपनाने के लिए कई कार्यक्रम चलाने के बड़े बड़े दावे कर रही है। बावजूद धौलियापाटा नहर लंबेे समय से पानी के बगैर बंद पड़ी है। किसान सूखी नहर में पानी चलवाने के लिए विभाग और जनप्रतिनिधियों के सामने कई बार फरियाद कर चुके हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। परेशान काश्तकारों ने अब बगैर सिंचाई के ही बुवाई करनी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार कुलूूूर नदी से बनी एक किमी लंबी धौलियापाटा नहर का जीर्णोद्धार वर्ष 2006-07 में हुआ था। इस नहर से धौलियापाटा, बगराटी, अठपैसिया के काश्तकारों के खेतों की सिंचाई होती है। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2015-16 में नहर की मरम्मत कराई थी। नहर के निर्माण में घटिया स्तर की गुणवत्ता अपनाने से नहर लंबे समय बंद पड़ी है। नहर की देखरेख के लिए बेलदार तक नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ नहर की हालत खस्ता है दूसरी तरफ कुलूर नदी में जेसीबी मशीनों के चलने के कारण जलस्तर काफी नीचे चला गया है।
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हालात यह हैं कि नहर ऊपर तो पानी काफी नीचे हो गया है। इसे ठीक करने में विभाग कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। काश्तकार नहर में पानी चलाने की अब तक कई बार मांग कर चुके हैं। लेकिन विभाग है कि वह सुनता ही नहीं है। जनप्रतिनिधियों से की गई शिकायत का भी कोई असर नहीं हो रहा है।
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मजबूर किसानों ने अब बगैर सिंचाई के खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी है जबकि शाक भाजी प्रभावित हो गई है। गुस्साए काश्तकारों ने नहर की हालत शीघ्र ठीक नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। चेतावनी देने वालों में पूर्व प्रधान राजेंद्र खाती, सुंदर बनाई, मोहन जोशी, पूरन रौतेला, सुंदर राठौर, पवन खाती, जोगा राम और दुर्गा राम आदि शामिल हैं।
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