राज्य में आचार संहिता लगने के बाद बहुप्रतीक्षित 14 करोड़ लागत की गरुड़ पेयजल योजना की फाइल फिर ठंडे बस्ते में पड़ गई है। अब अगली नव निर्वाचित सरकार योजना के निर्माण का अंतिम फैसला लेगी।
गरुड़ वृहद पेयजल योजना की फाइल वर्ष 2009 से सचिवालय में धूल फांक रही है। दो माह पूर्व गरुड़ पेयजल योजना के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई थी। योजना की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने से गरुड़ क्षेत्र के लोगों को विश्वास था कि आचार संहिता लगने से पूर्व योजना को वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी। जन प्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते योजना की फाइल दो माह से वित्त मंत्रालय में पड़ी रही।
योजना को वित्त मंत्रालय से स्वीकृति दिलाने के लिए क्षेत्रीय विधायक, और कांग्रेस के संभावित दावेदारों ने मेहनत की होती तो योजना का निर्माण कार्य आज तक शुरू हो जाता। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष नवीन ममगई का कहना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि गरुड़ पेयजल योजना के निर्माण के लिए जागरूक होते तो योजना का निर्माण कार्य आज तक शुरू हो जाता। बता दें कि गरुड़ क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पेयजल है।
गरुड़ बाजार, गढ़सेर, नौघर, फुलवारी गूंठ, भकुनखोला, माल्दे, पाये बैजनाथ, स्यालटीट आदि गांवों के लोगों को विश्वास था कि आचार संहिता लगने से पहले से गरुड़ पेयजल योजना को वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी। लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से गर्मी के सीजन में भी इन गांवों के लोगों को पेयजल संकट के दौर से गुुजरना पड़ेगा।