कुमाऊं की काशी के नाम से प्रसिद्ध बागेश्वर शहर में कूड़े की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है। पिछले दो माह से घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के लिए समझा रही नगर पालिका ने अब गांधीगीरी बंद कर दी है। नगर पालिका सरयू-गोमती नदियों के किनारे और नगर के सार्वजनिक स्थलों में कूड़ा डालने वालों से अब दो सौ से लेकर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना वसूलेगी।
बागनाथ मंदिर और पतितपावनी सरयू के पौराणिक महत्व को देखते हुए बागेश्वर को कुमाऊं की काशी कहा जाता है। यह धार्मिक नगरी सभी घरों में शत प्रतिशत शौचालय बनने के बाद ओडीएफ घोषित हो चुकी है। नदी किनारे खुले में शौच पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जा चुकी है, लेकिन कूड़े की समस्या अभी बनी हुई है।
पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों को भी असुविधा होती है। इसी को देखते हुए अब पालिका ने कूड़ा फैलाने वालों को समझाने के लिए ‘दंड नीति’ अपनाने का फैसला किया है। कूड़ेदान का प्रयोग नहीं करने वालों को दो से पांच हजार तक का अर्थदंड देना होगा।
पालिका की ओर से अब तक किए गए प्रयास
- नदियों सहित पूरे शहर को स्वच्छ रखने के लिए दो माह से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
- गांधीगीरी अपनाते हुए दुकानों के बाहर कूड़ा फेंकने वाले व्यापारियों को फूल दिए गए।
- सभी वार्डों में जैविक, अजैविक कूड़ेदान भी वितरित किए गए।
- पालिका कर्मियों और ब्रांड एंबेसडरों ने हर वार्ड में घर और दुकानों में जाकर भी समझाया।
- नगर में नुक्कड़ नाटक और प्रोजेक्टर के माध्यम से लोगों को प्रेरणादायी फिल्म भी दिखाई।
बागेश्वर शहर की स्वच्छता के लिए प्रयास जारी हैं। नगर को कूड़ा मुक्त करने के लिए दो माह से लोगों को समझाया जा रहा है। अभी भी कई लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। घरों और दुकानों का कूड़ा सार्वजनिक स्थलों में फेंका जा रहा है। ऐसे लोगों पर अब सख्ती करते हुए दो सौ से पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
- राजदेव जायसी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, बागेश्वर।