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शिक्षकों की कमी से जूझ रहा स्वतंत्रता सेनानियों के गांव का स्कूल

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बागेश्वर के चौरा स्थित हाईस्कूल भवन। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बागेश्वर के चौरा गांव के सात स्वाधीनता सेनानियों का देश की आजादी में अहम योगदान रहा है। लेकिन, आजाद भारत के शासकों की निगाह आजादी के 73 साल बीतने के बाद भी इस गांव पर दोबारा नहीं पड़ी। रखरखाव के अभाव में सड़क हादसे को दावत दे रही है। सड़क पर तमाम जगहों पर गड्ढे बने हुए हैं। सड़क पर मलबा गिर रहा है। गांव में हाईस्कूल है लेकिन सरकार वित्त पोषित करने की घोषणा पर अमल करना भूल गई।
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चौरा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मंगल सिंह धपोला, भवान सिंह धपोला, प्रेम सिंह धपोला, चंद्र सिंह धपोला, हयात सिंह धपोला, कल्याण सिंह धपोला और देव सिंह धपोला का गांव है। इन सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वर्ष 1948 में चौरा में सरदार पटेल जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई। ग्राम प्रधान आशा धपोला ने बताया कि वर्ष 1995 में स्कूल को हाईस्कूल की वित्त विहीन मान्यता मिली। वर्ष 2015-16 में स्कूल को सरकार टोकन ग्रांट के अंतर्गत लाई।
शिक्षा विभाग ने दो शिक्षकों की व्यवस्था के तहत तैनाती की है। स्कूल प्रबंधन समिति ने तीन पीटीए शिक्षकों की व्यवस्था की है। इन शिक्षकों को विद्यालय प्रबंधन समिति टोकन ग्रांट से वेतन देती थी लेकिन वर्ष 2016-17 से टोकन ग्रांट की धनराशि नहीं मिली। स्कूल के प्रबंधक हरीश धपोला ने बताया कि विद्यालय में 40 विद्यार्थी पढ़ते हैं। सरकार ने कई बार स्कूल को वित्त पोषित करने की घोषणा की लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। उन्होंने टोकन ग्रांट देने के साथ ही स्कूल को वित्तपोषित की मान्यता देने की मांग की है।
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