बागेश्वर। देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की आजाद भारत में ही नहीं सुनी जा रही है। सिस्टम की उपेक्षा से आहत बागेश्वर जिले के एक वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने आगामी 15 अगस्त को सरकार की ओर से दिए गए सम्मान पत्र को लौटाने की बात कही है।
आम जनता को तो नेता, सरकारें तो ठगती ही हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सेनानियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। कुछ ऐसा ही उदाहरण बागेश्वर जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेेनानी राम दत्त जोशी के मामले में भी है।
वर्ष 22 अक्टूबर 2013 को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बागश्वर जिले की दुगनाकुरी तहसील के लेसानी अक्सोड़ा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामदत्त जोशी के घर तक दो किमी लंबी सड़क बनाने की घोषणा की थी। परंतु इस घोषणा को अब तीन वर्ष का समय पूरा होने को है लेकिन अभी तक दो किमी सड़क नहीं बन पाई है।
कई बार पत्राचार करने के बाद भी सड़क न बनने से सेनानी खासे आहत हैं। वयोवृद्ध सेनानी राम दत्त जोशी ने तहसीलदार के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि घोषणा के बाद सड़क निर्माण के लिए वे कई बार जन प्रतिनिधियों से कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
शासन-प्रशासन के इस व्यवहार से वे बेहद खिन्न हैं। सेनानी जोशी का कहना है कि इस उपेक्षापूर्ण व्यवहार से उन्हें मानसिक पीड़ा हुई है। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक को लिखे पत्र में भी सड़क को ही अपनी अंतिम इच्छा बताते हुए सड़क निर्माण करने की मांग की है। यदि उनकी इसी तरह से उपेक्षा की गई तो 15 अगस्त के दिन सरकार की ओर से दिए गए सम्मान को वह लौटा देंगे।