विकास भवन में धरना देते राज्यकर्मीं।
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राज्य कर्मचारी अपनी लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होने से खफा हैं। गुस्साए कर्मियों ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय आह्वान पर शनिवार को नारेबाजी के साथ चार घंटे का कार्य बहिष्कार किया। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुई तो एक दिसंबर से आवश्यक सेवाओं को छोड़कर पूर्णकालीन कार्य बहिष्कार होगा। कहा कि इसके बाद भी मांगों की अनदेखी हुई तो आठ दिसंबर से आवश्यक सेवाओं का भी बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।
शनिवार सुबह राज्य कर्मचारी परिषद के जिलाध्यक्ष एससी पंत के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए विकास भवन के प्रांगण में पहुंचे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि शासन की घोर उपेक्षा के कारण एससीपी पुरानी व्यवस्था बहाल करने, कर्मचारियों को वाहन भत्ता देने, दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और शिक्षकों को डाक्टरों की तरह ही दुर्गम भत्ता देने, उपार्जित अवकाश की सीमा तीन सौ से बढ़ाकर पांच सौ रुपये करने और सातवें वेतनमान के सभी भत्ते देने समेत कुल 23 मांगें लंबित हैं।
इन समस्याओं को लेकर अब तक कई बार आंदोलन कर दिए, लेकिन सरकार है कि सुन ही नहीं रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर प्रदेश संगठन द्वारा घोषित तिथि से आंदोलन और भी तेज कर दिया जाएगा। सभा का संचालन जिला सचिव कैलाश भट्ट, पूरन परिहार, संजय टम्टा, बहादुर सिंह देव, नंदन गिरि, दीवान सिंह, दामोदर जोशी, चंद्र मोहन आर्या, राजन राम आदि शामिल थे।