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Bageshwar News: मन की बात से जन की चर्चा में आए लोक गायक पूरन

Sun, 26 Feb 2023 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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प्रधानमंत्री ने मन की बात में बागेश्वर के पूरन राठौर की कला का जिक्र किया
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बोले प्रधानमंत्री- पूरन ने लोक विधा में नई जान फूंकी है
बागेश्वर के रीमा निवासी लोक विधा के जानकार पूरन जन्म से हैं दृष्टि बाधित
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। बागेश्वर के दृष्टि बाधित लोक विधा के जानकार पूरन सिंह राठौर का नाम रविवार को राष्ट्रीय फलक पर छा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार विजेता पूरन सिंह राठौर की कला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तराखंड की लोक विधा में नई जान फूंकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरन ने उत्तराखंड की लोक विधा जागर, न्योली, हुड़काबौल के साथ ही राजुला मालूशाही लोक गाथा के गायन में महारत हासिल की है। उन्होंने उत्तराखंड के लोक संगीत में कई पुरस्कार जीते हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि उनके (राठौर) के बारे में जरूर पढ़ें।
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पूरन सिंह राठौर (39) बागेश्वर जिले के रीमा के रहने वाले हैं। दृष्टि बाधित पूरन की लोक कला के दीवानों की कमी नहीं है। वह इलाके में खासे चर्चित हैं। बीते 15 फरवरी को जब उन्हें प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार मिला तो वह और चर्चाओं में आ गए। अब प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने भी उनकी कला की सराहना की है। प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम में जिक्र आने से पूरन सिंह बेहद खुश हैं। जिले के लोगों में पूरन और पूरन की लोक विधा को लेकर जिज्ञासा और बढ़ गई है।
पूरन की उपलब्धि को बीते 18 फरवरी के अंक में अमर उजाला ने उस्ताद बिस्मिल्ला खान युवा पुरस्कार से सम्मानित हुए लोक गायक पूरन राठौर शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। राठौर का कहना है कि अमर उजाला ने उनकी उपलब्धि को प्रमुखता से स्थान दिया इसके लिए वह इस प्रतिष्ठित अखबार के आभारी हैं।

केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन मंत्री ने प्रदान किया था पुरस्कार
बागेश्वर। बीते 15 फरवरी को नई दिल्ली के रविंद्र भवन के मेघदूत रंगमंच परिसर में संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित समारोह में वर्ष 2019, 2020 और 2021 के पुरस्कार प्रदान किए गए। पूरन सिंह समेत देशभर के 102 कलाकारों का चयन पुरस्कार के लिए हुआ था। पूरन सिंह को उत्तराखंड लोक संगीत और गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार प्रदान किया था। उन्हें पुरस्कार के रूप में प्रतीक चिह्न के साथ ही 25,000 रुपये की राशि दी गई थी।

छह माह के थे जब चली गई थी दोनों आंखों की रोशनी
बागेश्वर। जब पूरन सिंह राठौर छह माह के थे तब उनकी दोनों आखों की रोशनी चली गई थी। देख पाने की क्षमता खोने के कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाए। उनका रुझान बचपन से ही पारंपरिक गीतों की ओर हो गया। वह लोक संगीत के प्रति गंभीर हो गए। उनकी सुरीली आवाज सुनकर लोगों ने भी प्रोत्साहित करना शुरू किया। 11 साल की उम्र से उन्होंने कार्यक्रमों में जाकर गाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उन्होंने पारंपरिक गीत-संगीत को ही अपनी आय का जरिया बना लिया। पूरन सिंह मेले और सांस्कृतिक समारोहों में लोक विधा की प्रस्तुति देने लगे। वह बागेश्वर के उत्तरायणी मेले के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों और देहरादून में लोक कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। पूरन कहते हैं कि उनकी आंखें तो चली गईं लेकिन भगवान ने उन्हें कला रूपी वरदान प्रदान किया है।
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पत्नी हेमा का हर कदम पर मिला साथ
बागेश्वर। पूरन सिंह की पत्नी हेमा देवी हर कदम पर अपने पति का साथ देती हैं। वह चार बच्चों की देखभाल करने के साथ-साथ कार्यक्रमों में पति का सहारा बनकर जाती हैं। दिल्ली में आयोजित समारोह में भी वह अपने पति के साथ रहीं। पूरन बताते हैं कि जागर सम्राट के रूप में प्रसिद्ध लोक गायिका बसंती बिष्ट दीदी और संगीत निर्देशक रणजीत सिंह ने उन्हें काफी सहयोग दिया है। रणजीत सिंह ही उनके वीडियो अपने स्टूडियो में निशुल्क बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर उन्हें पहचान दिला रहे हैं।
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