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पथरीली जमीन पर उगाए ‘रोजगार के फूल’ 

Sat, 14 Oct 2017 10:40 PM IST
गणेश उपाध्याय/अमर उजाला, बागेश्वर।
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छाती-मनकोट गांव में अपने फूलों से लहलहाते खेतों में राजेश चौबे।  - फोटो : amar ujala
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अपनी जमीन से लगाव और गांव की माटी से प्यार हो तो रोजगार का ‘रास्ता’ भी बनाया जा सकता है। इस बात की मिसाल हैं बागेश्वर ब्लॉक के छाती-मनकोट गांव के राजेश चौबे। राजेश उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो रोजगार की तलाश में पलायन कर जाते हैं। पर इस युवा ने अपनी 10 नाली पथरीली भूमि को समतल कर खेती के लायक बनाया और आज इस पर फूलों की खेती कर हजारों का मुनाफा कमा रहा है। 
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छाती-मनकोट के गिरीश चंद्र चौबे के पुत्र राजेश बचपन से ही कठोर परिश्रमी रहे हैं। वह वर्ष 2001 में इंटर की परीक्षा पास करके रोजगार की तलाश में दिल्ली और फिर देहरादून गए। वहां उन्हें नौकरी तो नहीं मिली, पर कहते हैं न कि ठोकरों से सीखोगे तो रास्ता भी बना लोगे। यही हुआ राजेश के साथ।

जब उन्हें नौकरी नहीं मिली तो उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपनी माटी में ही रहकर रोजगार ढूंढा जाए। राजेश बताते हैं कि उन्होंने आठ साल पहले अपनी 10 नाली बेकार पड़ी पथरीली भूमि को समतल किया। इस काम में परिवार के सदस्यों की हाड़तोड़ मेहनत के अलावा तब उनके आठ हजार रुपये भी खर्च हुए थे।
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राजेश बताते हैं कि सब्जियों से उन्हें एक सीजन में औसतन 80 हजार तक की आय होती है। इस बीच उन्होंने फूलों की खेती करने की भी सोची और इसके लिए उन्होंने बाजार का अध्ययन किया। उद्यान विभाग से संपर्क करने के बाद राजेश ने फूलों की खेती करने का निर्णय लिया।

उद्यान विभाग की हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन योजना के तहत उन्होंने 10 नाली भूमि में हाइब्रिड गेंदा प्रजाति के फूलों का उत्पादन शुरू किया। इस सीजन में अब तक वह हल्द्वानी के बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 10 क्विंटल फूल बेच चुके हैं। राजेश बताते हैं कि दीपावली पर वह बाजार में पांच क्विंटल फूल लाने की तैयारी में जुटे हैं। उनके बगीचेे में ग्लैडिलोस डहेलिया आदि फूलों की खुशबू भी महक रही है। 

आय के अन्य साधनों पर भी काम 
राजेश बताते हैं उनका परिवार को फूलों के अलावा दूध, दही और घी से महीने में पांच हजार रुपये की आय हो रही है। वह इन दिनों मशरूम की खेती का प्रशिक्षण ले रहे हैं। भविष्य में उनकी योजना मौन पालन की भी है। कारोबार में उनकी माता बसंती देवी, पिता गिरीश चंद्र, पत्नी प्रेमा, दो भाइयों में चंद्रशेखर और भारतेंदु का पूरा सहयोग मिल रहा है। 

गांव तक सड़क बने तो और हो लाभ 
राजेश के मुताबिक उनके खेतों के लिए पानी की कमी तो नहीं है, लेकिन गांव सड़क से नहीं जुड़ा है। सड़क का निर्माण होने पर इस कारोबार से कम से कम 10 परिवार और भी जुड़ सकते हैं। बाजार में फूलों की अच्छी खासी मांग है। बेरोजगार इस काम को अपने हाथ में लें तो इससे कई खाली हाथों को रोजगार मिल सकता है। रोजगार के लिए पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेेगा। 
 
इस क्षेत्र में फूलों की खेती की असीम संभावनाएं हैं। राजेश चौबे को हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन योजना के तहत मेरीगोल्ड महालक्ष्मी हाइब्रिड बीज और अन्य निवेश निशुल्क राज सहायता के रूप में उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने उत्साहजनक परिणाम दिया है। जिले के अन्य काश्तकारों को भी उनसे सीख लेनी चाहिए। फ्लोरीकल्चर से पहाड़ों से पलायन की समस्या का समाधान किया जा सकता है। 
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- कुलदीप जोशी, सहायक उद्यान अधिकारी। 
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