जिले की सबसे पुरानी कोतवाली में एक प्रभारी निरीक्षक, चार सब इंस्पेक्टर सहित कुल स्वीकृत 72 में से 53 कर्मचारी कार्यरत हैं।
इनके रहने के लिए मात्र 30 स्टाफ क्वार्टर हैं। इनमें से इस स्टाफ क्वार्टर गोमती के किनारे हैं, जहां बारिश के हर साल मौसम में बाढ़ की आशंका बनी रहती है। तेज बारिश के दौरान पुलिस कर्मियों की नींद उड़ जाती है।
बागेश्वर में आजादी के साथ ही थाने की स्थापना हो गई थी। 1967 में थाने का अपना भवन बन गया था। इसके बाद थाने को कोतवाली का दर्जा मिला। यहां कोतवाल सहित चार सब इंस्पेक्टर, चार हैड कांस्टेबल, पांच महिला कांस्टेबल और 58 पुरुष कांस्टेबल सहित कुल 72 पद सृजित हैं।
इन पदों के सापेक्ष कोतवाल सहित पांच सब इंस्पेक्टर, आठ हैड कांस्टेबल, चार महिला कांस्टेबल, 35 पुरुष कांस्टेबल कार्यरत हैं। कोतवाली का भवन पुराना होने के कारण सामान्य काम काज निपटाने में कई बार असुविधा होती है। आधुनिक तकनीकों के हिसाब से यहां नए भवन की आवश्यकता है।
कोतवाली पुलिस के लिए सबसे अधिक समस्या आवासों की है। महिला कांस्टेबलों के लिए दो मंजिला बैरक है, लेकिन कांस्टेबलों के साथ परिवार भी होने के कारण बैरकें खाली रहती हैं।
अधिकतर लोग किराए के मकानों में रहते हैं। कोतवाल और दो सब इंस्पेक्टर आवास सहित कुल 20 आवास हैं। इनमें से दस आवास गोमती के किनारे हैं।
यहां बारिश के मौसम में बाढ़ की आशंका बनी रहती है। 2013 में बाढ़ का पानी बैरकों के अंदर आने पर सभी आवास बरसातभर खाली करने पड़े।