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बागेश्वर में 194 हेक्टेयर जंगल चढ़ा वनाग्नि की भेंट

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अल्मोड़ा के जंगलों में लगी आग - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। जिले में कई स्थानों पर जंगल आग में सुलग रहे हैं। अल्मोड़ा के ठाट, रानीखेत, द्वाराहाट, जागेश्वर, बिनसर के निकटवर्ती जंगल आग में जलते रहे। रानीखेत और अल्मोड़ा के ठाट के जंगलों में अभी भी आग भड़की हुई है। इधर, जंगल की आग ने पॉलीटेक्निक की ओर रुख किया लेकिन दमकल की टीम ने आग पर काबू पा लिया।
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बृहस्पतिवार को राजकीय महिला पॉलीटेक्निक अल्मोड़ा के समीप जंगल में आग लग गई। आग पॉलीटेक्निक की ओर बढ़ रही थी। जिससे छात्राओं और कर्मचारियाें में दशहत फैल गई। जंगल में आग की सूचना फायर बिग्रेड को दी गई। सूचना मिलने के बाद फायर कर्मी एक वाटर टैंकर के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने आग पर काबू पाया। इधर, बख का जंगल भी आग में सुलगता रहा। लोगों ने जंगल में आग लगने से की सूचना फायर सर्विस को दी। सूचना मिलते ही फायर कर्मी घटनास्थल को रवाना हो गए। घटनास्थल पर पहुंच फायर कर्मचारियों ने मोटर फायर इंजन से पंपिंग कर आग पर काबू पाया।
भैंसवाड़ा फार्म के समीप जंगल में आग गई। देखते ही देखते जंगल की आग भैसवाड़ा फार्म की ओर बढ़ रही है। इससे वहां दहशत फैल गई है। जंगल में आग की सूचना फायर सर्विस को दी गई। सूचना मिलने पर प्रभारी अग्निशमन अधिकारी अल्मोड़ा उमेश चंद्र परगाई के नेतृत्व में फायर यूनिट ने घटनास्थल पर पहुंचकर दो मोटर फायर इंजन से पंपिंग कर काफी मशक्कत से आग को पूर्ण रूप से बुझाया। अग्निशमन टीम में एलएफएम प्रेमलाल, हरीश राम, राजेंद्र सिंह राणा, फायर सर्विस चालक मुकेश सिंह, उमेश दानू, एफएम धीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। इधर सोमेश्वर तहसील के जैंतकोट, पेसील, बैगनिया, विदुना के जंगल में आग भड़की रही। जंगल की आग से तहसील के समीप तक पहुंच गई। तहसीलदार और अन्य स्टाफ ने तहसील की ओर बढ़ रही आग को बुझाया। जंगल की आग से पांच हेक्टेयर जंगल जल गया है। जंगलों की आग से क्षेत्र में चारों तरफ धुंध छाई हुई है और लोगों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं।
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बागेश्वर में 194 हेक्टेयर जंगल चढ़ा वनाग्नि की भेंट
बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। फायर सीजन में वनाग्नि के 134 मामले दर्ज हो चुुके हैं और 194 हेक्टेयर में वन संपदा को नुकसान हुआ है। आग से करीब 5.90 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। तेजी से फैल रही आग से फैलने वाला धुआं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
फायर सीजन से पहले वन विभाग ने वनाग्नि से निपटने के लिए कई बैठकें की। क्रू स्टेशनों का निर्माण कर फायर वॉचरों की तैनाती भी कराई गई। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए गए। पंफलेट, नुक्कड़ नाटक से लोगों को जंगलों की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया गया। वन पंचायत सरपंचों से भी सहयोग की अपील की गई, लेकिन वनाग्नि काल में इन तैयारियों का कोई असर नहीं दिख रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर कांडा, कपकोट, गरुड़, धमरघर के जंगल धधक रहे हैं। विभाग मुस्तैदी से आग बुझाने के दावे कर रहा है लेकिन वनों को आग लगने से रोका नहीं जा रहा है। शुरुआती दौर में विभाग ने आग लगाने वालों को पकड़ते हुए सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी, लेकिन अब न तो आग लगाने वाले पकड़े जा रहे हैं और न ही जंगलों के जलने का सिलसिला थम रहा है। बुुधवार की रात भी जिले में वनाग्नि की छह घटनाएं दर्ज की गई। गरुड़ के बैजनाथ, गढ़खेत, बागेश्वर के रुनीखेत, खबडोली, रतघर और कपकोट-धरमघर क्षेत्र के जंगलों में भीषण आग लगी। इस दौरान जिले में करीब आठ हेक्टेयर वन संपदा जलकर खाक हो गई।
वनाग्नि को काबू करने के लिए विभागीय कर्मचारी और फायर वॉचर मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों का भी सहयोग मिल रहा है। आग लगाने वाले अराजक तत्वों पर भी नजर रखी जा रही है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर।

अल्मोड़ा सोमेश्वर में आग बुझाते वनकर्मी- फोटो : ALMORA

बागेश्वर के गढ़खेत के जंगल में लगी आग। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR

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