बागेश्वर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित आग पर काबू पाने और बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला अग्निशमन विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। स्टाफ, वाहन और उपकरणों की कमी के चलते अग्निकांड के समय मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जिले में बागेश्वर, गरुड़, कपकोट में तीन फायर स्टेशन हैं। फायरमैनों के 35 पदों में से 11 पद खाली हैं। इससे आग की घटनाओं के समय मुश्किलों से निपटना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है। अग्निशमन द्वितीय अधिकारी और अग्निशमन अधिकारी का भी एक-एक पद खाली है। विभाग को आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पानी, आग बुझाने वाले रसायन, भिन्न प्रकार के अग्नि-कवच, आगरोधक पोशाकें, पानी गिराने वाले विमान, अग्निशमकों के विशेष वाहन की जरूरत पड़ती है।
इनमें से विभाग के पास सबसे जरूरी फायर टैंकर, पंप, रेस्क्यू वाहन और वुड कटर तक की कमी है। अग्निशमन विभाग को फायर सीजन में आग की घटनाओं से निपटने के लिए सबसे अधिक सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे में फायरमैन और संसाधनों की कमी विभाग की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
निजी वाहनों से करना पड़ता है रेस्क्यू
गरुड़ (बागेश्वर)। फायर स्टेशन गरुड़ में वाहनों की कमी के चलते अग्निशमन कर्मियों को निजी वाहनों से रेस्क्यू करना पड़ता है। विभाग के पास रेस्क्यू वाहन की कमी बड़ी समस्या है। फायरमैन के दो पद भी खाली होने से आग की घटनाओं के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रेस्क्यू के लिए मिलेगा रोप लांचर और कैमरा
बागेश्वर। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महेश चंद्र ने बताया कि विभाग को रेस्क्यू के लिए रोप लांचर (नदी, पहाड़ी पार करने का सहायक उपकरण) और सेंसरयुक्त कैमरा मिलेगा। सेंसर से जमीन के अंदर दबे व्यक्ति को ढूूंढा जा सकता है। जंपिंग नेट और पैड की मांग मुख्यालय से की गई है। उन्होंने बताया कि ब्रीदिंग ऑपरेटर, एजवेस्टर शूट की भी मांग की गई है।
ब्रीदिंग ऑपरेटर से धुएं के दौरान आग पर काबू पाने में मदद मिलती है और एजवेस्टर शूट अग्निरोधक होता है। जिले में फायर टैंकरों की अधिकतम क्षमता 24 सौ लीटर है, जिससे रेस्क्यू के समय पानी की कमी हो जाती है। विभाग से पांच हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों की मांग की गई है। रेस्क्यू वाहन और वुड कटर भी मंगाया गया है।