बागेश्वर। वित्तीय वर्ष 2019-20 को समाप्त बोने में मात्र 13 दिन का समय शेष है लेकिन कई विभागों की अवमुक्त बजट खर्च करने की रफ्तार काफी धीमी है। धन खर्च करने में पिछड़ने वाले विभागों में समाज कल्याण, वन, चिकित्सा समेत तमाम विभाग शामिल हैं। यह आंकडे़ 29 मार्च तक के हैं।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय के अनुसार जनजाति कल्याण के लिए केंद्र सेक्टर से मले 2.5 लाख रुपये की रकम में से एक धेला भी खर्च नहीं हुआ है। समाज कल्याण विभाग को अनुसूचित जाति कल्याण के लिए मिले 283.59 लाख में से केवल 0.78 प्रतिशत ही धन खर्च हुआ है। समाज कल्याण विभाग को महिला कल्याण के लिए मिले 41.21 लाख रुपये में से मात्र 3.46 लाख यानि 8.40 प्रतिशत ही धन खर्च हुआ है। वन विभाग 7.18 लाख में से केवल 22.84 प्रतिशत धन खर्च कर सका है। माध्यमिक शिक्षा विभाग 324.30 लाख रुपये में से 49.52 प्रतिशत ही धन खर्च कर पाया है। पंचायतीराज विभाग 2425.32 लाख में से 50 प्रतिश धन खर्च कर सका है। समाज कल्याण विभाग वृद्धावस्था पेंशन पारिवारिक लाभ, सामाजिक सुरक्षा मद में 360.33 लाख में से 30.16 प्रतिशत धन खर्च कर सका है। दिव्यांग कल्याण में तीन लाख में से 43.67 प्रतिशत ही धन खर्च हुआ है। केंद्रीय सेक्टर से मिली धनराशि को मनरेगा, पीएमजीएसवाई, मिनी जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान, लघु सिंचाई, प्राथमिक शिक्षा विभाग ही पूरा खर्च कर पाया है।
राज्य सेक्टर में जिला पंचायतों को मिले अनुदान के 519.48 लाख में से 25.21 प्रतिशत ही खर्च हुआ है। समाज कल्याण विभाग को अनुसूचित जाति कल्याण के लिए मिले 155.05 लाख में से 48.58 प्रतिशत, विधायक निधि 52.58 प्रतिशत, समाज कल्याण एससीपी, टीएसपी में 50 प्रतिशत राशि खर्च हुई है। अन्य विभाग 62 से 99 प्रतिशत राशि खर्च कर पाए हैं। मनरेगा, स्वजल, रेशम, सिंचाई, प्राथमिक शिक्षा, समाज कल्याण के महिला कल्याण, माध्यमिक शिक्षा, पशुपालन, ग्रामीण एवं लघु उद्योग में ही शत-प्रतिशत धन खर्च हुआ है।
जिला सेक्टर में पूल्ड आवास 31.76 प्रतिशत, चिकित्सा विभाग 35.09 प्रतिशत, वैकल्पिक ऊर्जा में 66.73, अर्थ एवं संख्या 77 प्रतिशत, सूचना विभाग 75 प्रतिशत, सेवा योजन 79.25 प्रतिशत धन खर्च हुआ है। सहकारिता, पर्यटन, आयुर्वेदिक, महिला कल्याण, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, रेशम, दुग्ध, सामुदायिक विकास, पंचायतीराज, कला एवं संस्कृति, होम्योपैथिक चिकित्सा, भेषज, अनुसूचित जाति कल्याण, मत्स्य पालन में ही शतप्रतिशत खर्च हुआ है। शेष 13 दिनों में फिसड्डी विभाग कितना धन खर्च कर पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।