रिठायत-नबगढ़-दोफाड़ नहर को ठीक करते ग्रामीण।
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दोफाड़ की चार हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पुंगर नदी से बनी चार किमी लंबी रिठायत-नबगढ़-दोफाड़ नहर तीन साल पहले ध्वस्त हो गई थी। इस नहर को ठीक करने के लिए जब डबल इंजन की सरकार काम नहीं आई तो परेशान किसानों ने अब खुद ही फावड़े और बेलचे उठा लिए हैं। सोमवार को कई किसानों ने श्रमदान कर नहर को दुरुस्त करना शुरू किया। किसानों में इस बात की नाराजगी भी है कि अधिकारी उनसे हर बार यही कहते हैं कि इस्टीमेट भेजा गया है और बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
पुंगरघाटी विकास मंच के प्रवक्ता हरीश कालाकोटी के मुताबिक तीन साल पहले पुगंर नदी में आई बाढ़ में रिठायत-नबगढ़-दोफाड़ नहर ध्वस्त हो गई थी। चार किमी लंबी इस नहर से दोफाड़ गांव की करीब चार हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। नहर के दुरुस्त नहीं होने से किसानों को सिंचाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। काश्तकारों ने इस बार किसी भी झूठे आश्वासन में न आकर स्वयं ही नहर को ठीक करने का बीड़ा उठा लिया। काश्तकारों ने बेलचा और फावड़े लेकर नहर को ठीक करने का काम शुरू दिया है। इस काम में उमेद सिंह कालाकोटी, जगदीश सिंह, प्रेम सिंह, नैन सिंह, दीवान सिंह, विनोद सिंह, हिमांशु, मालती और प्रेमा देवी आदि लगे हुए हैं। इधर, सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि क्षतिग्रस्त नहर का इस्टीमेट शासन को भेजा गया हैै। बजट प्राप्त होते काम शुरू कर दिया जाएगा। वहीं किसानों का कहना है कि जब हम खुद ही नहर ठीक कर लेंगे, फिर बजट आ भी जाए तो उसका क्या लाभ।