इस वर्ष जहां एक ओर सूखे के कारण फसलें चौपट हो गई हैं वहीं खेतों में बचीखुची फसलों को जंगली जानवर चट कर रहे हैं। इसके चलते जनपद के किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। किसान मोर्चा ने प्रशासन से शीघ्र क्षति का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
इस साल बेमौसमी बारिश न होने के कारण सूखे के जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जहां कई इलाकों में बारिश नहीं होने के कारण समय पर बुवाई नहीं हो सकी वहीं, जिन क्षेत्रों में किसानों ने बुवाई की वहां भी खेती खासी प्रभावित हुई है। सूखे के कारण बची-खुची फसलों को अब जंगली जानवर चट कर रहे हैं।
ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहले सूूखा और अब सुअरों के आतंक के कारण किसान परेशान हैं। झुंड की शक्ल में खेतों में घुस रहे सुअर गेहूं, जौ, मसूर की फसलों को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं बाड़ों में घुसकर सब्जियों को भी तहस-नहस कर रहे हैं।
सूखे के साथ ही जंगली सुअरों के फसलों, सब्जियों को नुकसान पहुंचाने से खेतीबाड़ी पर निर्भर किसानों की कमर टूट गई है। भाजपा किसान मोर्चा ने जिला प्रशासन से सूखे, जंगली जानवरों द्वारा की गई फसलों की क्षति का आंकलन कर शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।
जिले के किसानों को पिछले वर्ष हुई फसलों की क्षति का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। इसके चलते भाजपा किसान मोर्चा में जबरदस्त नाराजगी है। मोर्चा के महामंत्री धन सिंह का कहना है कि जनपद के किसान पिछले दो वर्षों से लगातार आपदा की मार झेल रहे हैं।
इसके बावजूद प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया है। उन्होंने इस उपेक्षा के खिलाफ आगामी आठ फरवरी को तहसील में धरना, प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।