ओलावृष्टि से तबाह गेहूं के खेत को मायूस होकर देखती एक महिला।
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ओलावृष्टि ने जनपद के लाहुर गांव में भारी तबाही मचाई है। ओलों से खेतों में तैयार हो रही गेहूं और जौ की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई। हालात यह हैं कि किसानों के खेतों में बीज भंडारण के लायक भी फसलें नहीं बची हैं। अखरोट और नींबू के पेड़ों से फलों के साथ ही पत्तियां भी साफ हो गई। मौसम की मार से खेतीबाड़ी पर निर्भर किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा शीघ्र क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
खीम सिंह ने बताया कि लाहुर क्षेत्र में पहली बार इतनी भयानक ओलावृष्टि हुई है। फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। खेतों में तैयार हो रही साक भाजी भी नष्ट हो गई है। उनके खेतों में अगले सीजन के लिए बीज भंडारण के लायक भी फसलें नहीं हैं।
लाहुर निवासी पोखर सिंह ने कहा कि अधिकांश परिवारों का गुजर बसर खेती किसानी से ही होती है। लेकिन इस बार हुई ओलावृष्टि से खेतों में कुछ भी नहीं बचा है। अखरोट, नींबू सब बरबाद हा गया। मौसम की मार से सभी किसान प्रभावित हैं।
मोहन सिंह ने बताया कि उनकी पूरी फसल और सब्जियां चौपट हो गई हैं। गेहूं के डंठल खेतों में शेष बचे हैं। खेतों में लहलहा रही गेहूं, जौ के साथ ही आलू की फसल का नामोनिशान नहीं बचा है। प्रशासन को शीघ्र क्षति का आंकलन कर उन्हें मुआवजा देना चाहिए।
पान सिंह ने बताया कि फसलों पर ओलों की मार से सभी ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। ओलों से खेतों में कुछ भी नहीं बचा है। कृषि और पशुपालन कार्य पर निर्भर गांव के गरीब लोगों के लिए यह संकट का समय है।