झिरौली में विवाहिता की संदिग्ध मौत में हत्यारोपी ससुरालियों की एक माह बाद भी गिरफ्तारी न होने पर मायके वाले भड़क उठे। पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए प्रभारी एसपी का घिराव किया। पुलिस ऑफिस में ही धरने पर बैठने जा रहे मायका पक्ष को एसपी ने वार्ता के लिए बुलाया। 15 दिन में कार्रवाई के भरोसे के बाद मायका पक्ष ने धरना स्थगित कर दिया।
बड़ी संख्या में अल्मोड़ा के कराया गांव निवासी मृतका के माता-पिता, भाई समेत मायके पक्ष के तमाम संबंधी और मित्र शनिवार सुबह साढ़े 10 बजे विरोध जताने बागेश्वर मुख्यालय पहुंचे। मायका पक्ष के चार दर्जन लोगों ने यहां एसपी दफ्तर घेर लिया। भड़के मायके वालों ने पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। इसको लेकर नाराज लोगों ने पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई। भड़का मायका पक्ष एसपी दफ्तर में ही धरने पर बैठने जा रहा था। इस बीच प्रभारी एसपी पंकज भट्ट ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया।
इस दौरान मायका पक्ष ने पुलिस जांच की दशा और दिशा पर आपत्ति जताई। कहा कि तमाम सबूतों को नजरअंदाज कर जांच में ढिलाई बरती जा रही है। इससे साफ है कि आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने हत्यारोपी ससुरालियों को अविलंब गिरफ्तार करने की मांग की। एसपी ने मायका पक्ष को 15 दिन के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिया। कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद हर पहलू से जांच होगी। इसके बाद मायका पक्ष शांत हुआ और धरना स्थगित कर दिया। उन्होंने दी समय सीमा में गिरफ्तारी न होने पर धरने पर बैठने की चेतावनी दी।
इस दौरान मां विमला, पिता चंद्र दत्त जोशी, मामा पूर्णानंद शर्मा, गिरीश शर्मा, कराया प्रधान नरेंद्र रौतेला, वीरांगना समिति की बसंती कपकोटी, तारा दानू, अनीता रावल, शांति कोरंगा, गंगा माजिला, गंगा शाही, हंसी देवी, बालकृष्ण, रमेश भंडारी आदि थे।
एसपी ने सात दिन में मांगी फोरेंसिक रिपोर्ट
बढ़ते दबाव के बीच प्रभारी एसपी ने सात दिन में तथाकथित सुसाइड नोट की फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में उन्होंने शनिवार को देहरादून विधि प्रयोगशाला को डीओ लेटर जारी किया है। एसपी का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से जांच की दिशा तय होगी। इसके साथ ही आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसेगा।