पहाड़ में चारा संकट से निजात दिलाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को एजोला चारे के रूप में हरे चारे का विकल्प दिया है। एजोला चारा बेहद कम जगह में न्यूनतम लागत में उगाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के वैज्ञानिक इन दिनों किसान मेलों के जरिए किसानों को इसकी जानकारी दे रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में पशुओं के लिए हरा चारा उत्पादन एक बड़ी समस्या है। पशुओं के लिए हो रहे चारे की कमी से किसान अब पशु पालन से भी मुंह मोड़ रहे हैं। पहाड़ में किसान सूखी घास तो एकत्र करते हैं लेकिन पूरे साल हरा चारा पैदा करना किसानों के लिए बड़ी दिक्कत पैदा करता है। इस समस्या से निबटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एजोला के रूप में हरे चारे का विकल्प किसानों को दिया है।
केवीके काफलीगैर के वैज्ञानिक डॉ. एनके सिंह और डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि एजोला चारा बेहद कम जगह व कम लागत में उगाया जा सकता है। इसके उत्पादन के लिए बीज की भी आवश्यकता नहीं होती है। शुरूआत में केवीके चारे का बीज मुहैया कराता है। बाद में वही चारा बीज का काम करता है।
ऐसे करें एजोला चारे का उत्पादन
केवीके काफलीगैर के प्रबंधक डॉ. एमपी सिंह बताते हैं कि घर में ही एक फिट गहरा दो मीटर चौड़ा गड्ढा बनाकर उसमें प्लास्टिक डालकर पानी भर दिया जाता है। पानी भरने के उपरांत उसमें एजोला चारे का बीज डाल दिया जाता है। कुछ ही दिनों के पश्चात हरा चारा तैयार हो जाएगा। चारे को पानी से बाहर निकालकर धोने के बाद सूखे चारे में मिलाकर मवेशियों को दिया जा सकता है।
पोषक तत्व से भरपूर है एजोला चारा
एजोला चारे में 25 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। पहाड़ में हरे चारे की समस्या से निबटने के लिए एजोला चारा बेहद लाभकारी विकल्प है। इसे साल भर इस्तेमाल किया जा सकता है। केवीके काफलीगैर किसानों केे एजोला चारे का बीज मुहैया करा रहा है।
कोट : एजोला चारे मूलत: फर्न प्रजाति का पौधा है जो कि पानी में पैदा होता है। पहाड़ में हरे चारे की समस्या से निबटने के लिए इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। एजोला में भरपूर प्रोटीन होता है। नाइट्रोजन फिक्सेसन व जैव उर्वरक का काम भी एजोला करता है।
: डॉ. एनके सिंह, कृषि वैज्ञानिक, केवीके काफलीगैर