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पूर्व सैनिक रौतेला ने जलाई शिक्षा की ज्योति

Sun, 26 Apr 2015 10:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ बागेश्वर
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शिक्षा के व्यवसायीकरण के इस युग में जहां कई स्कूल संचालक अभिभावकों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। वहीं पल्ला कमस्यार क्षेत्र के एक अवकाश प्राप्त कैप्टन ने पांचवीं कक्षा तक एक स्कूल खोलकर मनमर्जी फैलाने वालों को आइना दिखाया है। शिक्षाप्रेमी पूर्व कैप्टन बच्चों को बगैर फीस के शिक्षा दे रहे हैं जबकि शिक्षकों को वह अपनी पेंशन से मानदेय देते हैं।
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नरगोली गांव निवासी चामू सिंह रौतेला के पुत्र लक्ष्मण सिंह रौतेला ने वर्ष 1956 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। कुछ समय बाद वह केआरसी में भर्ती हो गए। उन्होंने वर्ष 1962 में भारत चीन, 65, 71 में पाकिस्तान से हुई लड़ाई में अदम्य साहस का परिचय दिया था। सेना ने उन्हें रक्षा मेडल से सम्मानित किया था।

वह वर्ष 1984 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह सामाजिक कार्यों से जुड़ गए। बच्चों की पढ़ाई को लेकर बढ़ते पलायन, स्कूलों में शिक्षकों में घटती संख्या से वह काफी व्यथित हो गए। उन्होंने वर्ष 2001 में देवतोली गांव में अपनी पेंशन से चार सौ रुपए में किराए का मकान लिया और चंडिका शिक्षा निकेतन के नाम से कक्षा पांचवीं तक के स्कूल की स्थापना की। उन्होंने दो शिक्षकों की भी तैनाती की। कुछ समय बाद बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूल को मान्यता भी मिल गई। अब इस स्कूल में 27 बच्चे रजिस्टर्ड हैं।
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सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थापित इस स्कूल की खासियत यह है कि पूर्व कैप्टन रौतेला बच्चों से फीस नहीं लेते जबकि यहां तैनात शिक्षकों को मानदेय भी अपनी पेंशन से देते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा दान के बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य से पलायन तभी रुकेगा, जब शिक्षा को संरक्षण मिलेगा। उत्तराखंड को शिक्षा का हब बनाने के लिए शासन को बारीकी से सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बचाने के लिए शिक्षकों को भी कड़ी मेहनत करनी होगी।
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