बागेश्वर में ऊर्जा संरक्षण दिवस पर विचार रखते वक्ता। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) की पहल पर ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर हुई गोष्ठी में डायट के प्राचार्य डॉ. केएस रावत ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों कृषि, उद्योग, वाणिज्य, परिवहन आदि समस्त क्षेत्रों में ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ रही है। ऊर्जा आर्थिक विकास की मूलभूत आवश्यकता है।
बागेश्वर जीआईसी के सभागार में हुई गोष्ठी में डॉ. रावत ने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती खपत से जीवाश्म ईधन पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। जीवाश्म ईधन के प्रयोग से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण की वजह से भावी पीढ़ी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। जीआईसी के प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार तेवाड़ी ने कहा कि ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर अभी से ध्यान केंद्रित करते हुए उनके कुशलतापूर्वक उपयोग की तकनीकें विकसित करना अति आवश्यक हो गया है, ताकि भावी पीढ़ी के लिए समुचित ऊर्जा संसाधन उपलब्ध रहे। प्रवक्ता दीप चंद्र जोशी ने कहा कि उरेडा प्रदेश में सौर ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा और बायोमास से विद्युत उत्पादन कर रहा है। घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोतों सो पूर्ण करने में सफल हुए तो ग्रिड की ऊर्जा का उपयोग उद्योग धंधों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में कर सकेंगे। डायट प्रवक्ता डॉ. राजीव जोशी ने ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया।
गोष्ठी के दौरान विगत दिनों हुई भाषण, निबंध, चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों को उरेडा की ओर से एलईडी बल्ब, ऊर्जा संरक्षण संदर्भित साहित्य वितरित किया गया। मोहन सिंह धामी के संचालन में हुए कार्यक्रम में पान सिंह रावत, अवर अभियंता दीवान सिंह बिष्ट, अनी राम आर्या, गिरीश जोशी, मनोज कांडपाल, सुरेश राम, महिपाल डसीला, राजेश आगरी, प्रताप महरा, नीलम कार्की, जीतेंद्र जोशी, गोविंद प्रकाश, भगवती प्रसाद, मीरा देवी आदि मौजूद थे।