बागेश्वर। बीएसएनएल ऊर्जा निगम की बकाया राशि भुगतान करने के लिए पैसे का इंतजाम नहीं कर पाया। ऐसे में शनिवार से जिले के 23 टॉवरों की बिजली कटने में मात्र एक दिन का समय शेष रह गया है। यदि इन टावरों की बत्ती गुल होती है तो जिला मुख्यालय के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बीएसएनएल की सेवा पूरी तरह चरमरा जाएगी। लोगों को निजी संचार कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
आठ मोबाइल टावरों की बिजली कटने के बाद भी भारत सरकार की संचार कंपनी बीएसएनएल बिजली का बकाया चुकाने के लिए रकम का इंतजाम नहीं कर पाया है। 23 कनेक्शन और कटने के कगार पर हैं। बीएसएनएल के पास ऊर्जा की वैकल्पिक व्यवस्था के भी साधन नहीं हैं। बीएसएनएल के जूनियर टेलीकांम आफीसर (जेटीओ) हेमंत जोशी का कहना है कि बिजली बकाया चुकाने के लिए रकम मांगी गई है। अब तक रकम नहीं मिली है।
बता दें कि यूपीसीएल ने 23 मोबाइल टावरों बकाया भुगतान के लिए बीएसएनएल को 13 मार्च तक का समय दिया है। यह मियाद शुक्रवार को समाप्त हो जाएगी। यूपीसीएल के ईई भाष्कर पांडे के अनुसार 14 मार्च से इन टावरों के बिजली के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इन टावरों पर सात हजार रुपये से डेढ़ लाख तक का बकाया है।
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इन टावरों की कटेगी बिजली
बिजली बिल बकाया वाले टावरों में नियर डिग्री कॉलेज कठायतबाड़ा, काफलीगैर, दोफाड़, लीती, कर्मी, जौलकांडे, हरसिला, कपकोट, कमेड़ीदेवी, शामा, घिघारतोला, सानिउडियार, कांडा, बिलौना, सूपी, चौड़ास्थल, हवनतोली, जेठाई, बुड़घुना, गरुड़, तहसील रोड, चौरासी नुमाइशखेत, गरुड़ का टावर शामिल हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था के भी नहीं हैं इंतजाम
बागेश्वर। बीएसएनएल के पास बिजली के कनेक्शन कटने की स्थिति में टावरों को संचालित करने के लिए ऊर्जा की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था के सवाल पर वह बीएसएनएल के जेटीओ हेमंत जोशी कहते हैं कि टावरों में जनरेटर तो हैं लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष से जनरेटर चलाने के लिए डीजल भी नहीं मिला, इस कारण अधिकांश जनरेटर ठीक हालत में नहीं हैं।