बागेश्वर। होनहार बिरवान के होत चीकने पात, इस कहावत को चरितार्थ किया है मंडलसेरा की रहने वाली ईशा धामी ने। सीमित संसाधनों के बावजूद आनंदी एकेडमी की छात्रा ईशा ने कड़ी मेहनत के दम पर गायन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने राष्ट्रीय कला उत्सव में एकल गायन के दम पर प्रदेश को पहला स्थान दिलाया है।
शिक्षक माता-पिता मोहन सिंह धामी और रश्मि धामी की बेटी ईशा संगीत विद्यालय में हारमोनियम सीखने जाती थी। उसके गायन को सुनकर शिक्षक अमित गौतम ने उन्हें गाने की सलाह दी। एक बार गाना शुरू करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने राजेंद्र प्रसाद से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। नियमित अभ्यास और विद्यालय स्तर पर होने वाले आयोजनों में प्रतिभाग करने से उनके गायन में निखार आता गया। इसके बाद उन्होंने सारेगामापा लिटिल चेंप, दूर आइडल, बागेश्वर टैलेंट शो आदि में भी भाग लिया। पिछले साल उन्हें विद्यालय की ओर से कला उत्सव में भागीदारी करने का मौका मिला। पारंपरिक गायन के महिला वर्ग में उन्होंने बेहतरीन गायकी का नमूना पेश कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। इसकी बदौलत उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी का मौका मिला। बृहस्पतिवार को निकले परिणाम में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विजेता घोषित किया गया।
विजेता के रूप में उन्हें शिक्षा मंत्रालय की ओर से उन्हें 25 हजार की धनराशि, प्रशस्तिपत्र और शील्ड दी जाएगी। उनकी जीत पर विधायक चंदन राम दास, जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव, सीईओ पदमेंद्र सकलानी, शिक्षक आलोक पांडेय, कैलाश प्रकाश चंदोला, डॉ. हरीश दफौटी, आनंदी एकेडमी के प्रबंधक मनमोहन सिंह भाकुनी, प्रधानाचार्य गौरव पंत आदि ने खुशी जताई है।
ईशा ने गाया सुवा रे सुवा बनखंडी सुवा जा सुवा नगरिन न्यूत दी आ...
बागेश्वर। ईशा धामी की पारंपरिक फोक, कुमाऊंनी, गढ़वाली और हिंदी गायन में विशेष रुचि है। कला उत्सव की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने प्रदेश की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा शकुनाखर सुवा रे सुवा बनखंडी सुवा, जा सुवा नगरिन न्यूत दी आ का गायन किया। ऑनलाइन माध्यम से हुई प्रतियोगिता में उनके गाए गीत को निर्णायकों के सर्वाधिक अंक मिले।
क्या है शकुनाखर
बागेश्वर। शकुनाखर शादी-विवाह, जनेऊ, नामकरण सहित अन्य शुभ अवसरों पर गाया जाने वाला पारंपरिक गीत है। शुभ कार्यों की शुरूआत गणेश पूजा से की जाती है। पूजा से पूर्व पारंपरिक गायिकाएं शकुनाखर के माध्यम से देवताओं और पितरों को आशीर्वाद देने के लिए शकुनाखर गाकर आमंत्रित करती हैं। इसलिए उत्तराखंड में शकुनाखर का बड़ा महत्व है।
पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मिला स्थान
बागेश्वर। कला उत्सव में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त करने वाली ईशा धामी जिले की पहली प्रतिभागी बन गई हैं। कला उत्सव की शुरुआत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष 2015 में की थी। जिले से इस वर्ष ईशा के अलावा राजकीय इटंर कॉलेज सलानी के राहुल कुमार ने मूर्ति कला और संतोष कुमार ने खेल और खिलौने प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर स्थान बनाया था। इससे पूर्व भी राइंका सलानी के छात्रों ने 2016-17 में भोपाल में हुए राष्ट्रीय कला उत्सव के दृश्य कला में भागीदारी की। हालांकि तब टीम पुरस्कार जीतने में असफल रही थी। राइंका सलानी के कला शिक्षक डॉ. हरीश दफौटी ने कहा कि ईशा की सफलता से जिले के बच्चों को प्रेरणा मिलेगी।