बागेश्वर। वर्ष 2020 महाविद्यालय से कैंपस बने बीडी पांडे परिसर को सरकार भूल गई है। यहां महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए प्राध्यापकों की कमी है। कैंपस में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं होने से जगह- जगह बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। कक्षा कक्षों की स्थिति स्टोर रूम की तरह हो गई है। एक ओर टूटा-फूटा सामान रखा गया है दूसरी ओर उन्हीं में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
सरकार ने वर्ष 2020 में बीडी पांडे महाविद्यालय को कैंपस का दर्जा दे दिया। तीन साल बाद कैंपस का विधिवत शुभारंभ हो पाया। छात्र-छात्राओं को उम्मीद थी कि कैंपस बनने के बाद यहां व्यवस्थाओं में सुधार होगा। कैंपस में कई विषयों के 80 प्राध्यापकों के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष वर्तमान में छह स्थायी प्राध्यापक और 17 अतिथि प्राध्यापक तैनात हैं। प्राध्यापकों के रिक्त पदों से यहां होने वाले शिक्षण कार्यों का अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में कैंपस में 2174 छात्र संख्या है। जब यह कैंपस नहीं बना था तब यहां 3500 से अधिक छात्र संख्या होती थी। सुविधा नहीं होने और प्राध्यापकों के नहीं होने से छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए अल्मोड़ा, हल्द्वानी, पिथौरागढ़ सहित कई महाविद्यालयों में जाने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद यहां प्राध्यापकों की नियुक्ति करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।