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फांसी टलने से बुलंद हो रहे अपराधियों के हौसले

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अमर उजाला संवाद बागेश्वर में मौजूद लोग। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। निर्भया कांड को लेकर बागेश्वर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि निर्भया कांड इस सदी का बड़ा जघन्य अपराध था। तब से महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। साथी न मिलने पर अकेेले घर से निकलने का जोखिम उठाने की बजाय घरों में रहना ही बेहतर समझा जा रहा है।
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तहसील रोड स्थित बरात घर में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि मजबूत पैरवी के आधार पर न्यायालय से निर्भया कांड के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद दो बार फांसी टलने के कारण पीड़िता के परिजनों समेत अधिकतर देशवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सजा के आदेश का अनुपालन न होने से सभी अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। इस कारण अपराध बढ़ने की आशंका जताई गई है।
सजा टलने का कारण बताया
निर्भया कांड की घटना के समय एक केस के सभी दोषियों को एक साथ सजा दिलाने का नियम था। उसी कानूनी पहलू का लाभ इस कांड के दोषी उठा रहे हैं लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सात दिन में सभी विकल्प पूरे करने का समय दिया है। अब उनके पास तीन, चार दिन का समय बचा है। नया डेथ वारंट जारी होने के 14 दिन में फांसी हो सकती है। निर्भया कांड के बाद नया कानून बन चुका है। इसके तहत हर दोषी को अलग तिथि को फांसी हो सकती है। इसलिए धैर्य रखने की जरूरत है।
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- भगवती धपोला, एडवोकेट, बागेश्वर।
अधिकारी भी सुरक्षित नहीं
समानता के अधिकार के कारण अब लोकसेवा में भी कई महिलाएं अधिकारी बन चुकी हैं। उनको सुरक्षा भी उपलब्ध रहती है। इसके बावजूद वह सुरक्षा घेरे में भी रात के समय घटनास्थल पर जाने में खतरा महसूस करती हैं। - नीमा दफौटी, अध्यक्ष रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति
सजा में देरी से बढ़ी चिंता
निर्भया जैसे जघन्य दुष्कर्म और हत्याकांड के दोषियों को छह साल बाद भी सजा नहीं हो सकी है। यह देश का सबसे चर्चित मामला रहा। इसी कारण देशवासी सड़कों पर उतरे तो अन्य अपराधों के दोषियों को कब सजा मिलती होगी? - मीरा रौतेला, गृहिणी बागेश्वर।
देशवासियों का चिंतित होना वाजिब
पूरे देशवासियों को पता है कि निर्भया कांड के दोषी निर्दोष नहीं है। इसके बावजूद वह हर प्रकार से बचाव का रास्ता खोज रहे हैं। ऐसे में संगीन आरोप के दोषियों को सजा दिलाने में हो रही देरी से देशवासियों का चिंतित होना वाजिब है।
- शोभा मिश्रा, गृहिणी बागेश्वर।
महिला सशक्तीकरण जरूरी
देश में महिला सशक्तीकरण जरूरी है। इसीलिए पंचायतों में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके बावजूद कई महिला जनप्रतिनिधि भी स्वयं निर्णय लेने से बच रही हैं। इसके लिए स्वावलंबन भी जरूरी है।
- मुन्नी नेगी, गृहिणी बागेश्वर।
इंतजार की इंतिहा
निर्भया कांड वर्ष 2012 में दिल्ली में शाम के समय हुआ था। तब दोषियों को तत्काल सजा दिलाने के लिए देशभर के लोग सड़कों पर उतरे थे। तब उम्मीद थी सजा जल्द होगी लेकिन अब छह साल के इंतजार की इंतिहा को चुकी है।
- चंद्रा पांडे, गृहिणी बागेश्वर।
सजा मिलने में देरी असहनीय
हर अपराध के दोषी को सजा होनी चाहिए। तभी लोग अपराध करने से डरेंगे। सजा के आदेश का अनुपालन करने में हो रही देरी असहनीय है। इसी कारण देशवासियों ने निर्भया कांड के समय सड़कों पर उतरकर विरोध, प्रदर्शन किया था। - तनुजा वर्मा, गृहिणी बागेश्वर।
जन जागरूकता जरूरी
अपराध किसी भी स्थान पर हो सकते हैं लेकिन जन जागरूकता की कमी के कारण लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि उनका हक और कर्तव्य क्या है? इस जागरूकता के अभाव में भी अपराध बढ़ते हैं। इनकी रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान जरूरी हैं।- सुनीता भट्ट, गृहिणी बागेश्वर।
अच्छे संस्कार से रुकेंगे अपराध
हर व्यक्ति की पहली पाठशाला उसका घर होता है। अगर हम बच्चों को अच्छे संस्कार देंगे। उनकी गतिविधियों और मनोदशा पर नजर रखेंगे। उसी के अनुरूप व्यवहार करेंगे तो अपराध कम हो सकते हैं। अन्य लोगों पर भी यही नियम लागू होता है। - इंदु चौबे, गृहिणी बागेश्वर।
घरेलू हिंसा रोकनी चाहिए
हमारे देश में घरेलू हिंसा रोकने के लिए भी कानून बना है। इसके बावजूद लोग जाने, अनजाने घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं। अपराध को सहनकर वह भी परोक्ष रूप से अपराधी की मदद ही करते हैं। इसलिए आपसी चर्चा से हर समस्या का समाधान हो सकता है।
- भगवती देवी, गृहिणी बागेश्वर।
महीने भर में मिले दोषियों को सजा
निर्भया कांड के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) की स्थापना कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने का कानून बना था। इसलिए हमारी सरकार और नीति नियंताओं को चाहिए कि वह माह भर में दोषियों को सजा दिलाएं। - बबीता पांडे, सभासद सैंज
समय पालन जरूरी
हमारे देश में सेवा, सूचना, शिक्षा का अधिकार लागू हो चुका है। इनके तहत लोगों को तय समय पर लोक सेवा और सार्वभौमिक सुविधा मिलने का समय तय किया गया है। केंद्र सरकार को सभी संस्थाओं में यही समय पालन लागू करवाना चाहिए। - तुलसी देवी, गृहिणी बागेश्वर।
संगठित होकर करें विरोध
कई महिलाएं चुपचाप अपराध सहन करने को मजबूर होती हैं। इस कारण वह अपनी समस्या दूसरों को बताती भी नहीं हैं। इससे भी अपराध बढ़ रहे हैं। इसलिए हम सबको चाहिए कि हर अच्छाई का स्वागत करें और हर अपराध का संगठित होकर विरोध करें। - मालती देवी, गृहिणी बागेश्वर।
पीड़ित पक्ष की हो मदद
अगर कोई महिला अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती है तो उसे कई प्रकार के दबाव झेलने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में हम सभी नागरिकों को चाहिए कि वह पीड़ित पक्ष की हरसंभव मदद करें। तभी अपराधी को सजा मिल सकेगी। - गुड्डी देवी, हस्तशिल्पी बागेश्वर।
घटनाएं न छिपाएं
पहाड़ में भी कई अपराध होते हैं लेकिन लोकलाज और भौगोलिक दूरी जैसी मजबूरियों के कारण कई घटनाएं उजागर नहीं हो पाती हैं। इसलिए अपराध की अनदेखी करना भी गलती है। पहचान छिपा लो लेकिन घटनाएं नहीं छिपानी चाहिए। - सुनीता टम्टा पूर्व कनिष्ठ उपप्रमुख
आरोपियों का न हो बचाव
हर अपराध की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपनी बात, सबूत, गवाह पेश करने की छूट रहती है लेकिन निर्भया जैसे संवेदनशील मामलों में अपराधियों को बचाव की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। अधिवक्ताओं को भी ऐसे अपराधियों की पैरवी नहीं करनी चाहिए। - पार्वती देवी, गृहिणी बागेश्वर।
नारी को देवतुल्य माना जाता है
हमारी वैदिक संस्कृति में नारी को देवतुल्य माना जाता है। इसके बावजूद कई लोगों और अपराधियों का नजरिया खराब रहता है। इसी कारण अपराध बढ़ जाते हैं और अपराध के पीड़ितों को आजीवन शर्मिंदगी महसूस करना पड़ती है। - मुन्नी जोशी, गृहिणी बागेश्वर।
शिक्षा प्रणाली में हो सुधार
हमारे देश में शिक्षा के गिरते स्तर से भी अपराध बढ़ रहे हैं। पहले स्कूलों में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किया गया था। महापुरुषों की जीवनियां और संस्करण पढ़ने से भी लोगों को अच्छी शिक्षा और संस्कार मिलते थे लेकिन अब लोग मोबाइल फोन तक सीमित हैं। - भगवती जोशी, गृहिणी बागेश्वर।
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