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Uttarakhand News: सड़क नहीं...सुविधा नहीं, बागेश्वर के ग्रामीणों के लिए हर महीने बनता है मरीज ढोने का संकट

Tue, 04 Nov 2025 02:30 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

कपकोट के बड़ेत ग्राम पंचायत के कफलानी तोक से तीन दिन में दो मरीजों को डोली से तीन किमी दूर सड़क तक लाना पड़ा। सड़क विहीन गांव में हर महीने ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन को लोगों का दर्द नहीं दिख रहा है।
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कपकोट में बड़ेत के कपलानी तोक से बीमार को डोली से लाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागेश्वर जिले के कपकोट के बड़ेत ग्राम पंचायत के कफलानी तोक से तीन दिन में दो मरीजों को डोली से तीन किमी दूर सड़क तक लाना पड़ा। सड़क विहीन गांव में हर महीने ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन को लोगों का दर्द नहीं दिख रहा है। ग्रामीण बद्री गोस्वामी, दलीप सिंह, मोहन नाथ, दीवान सिंह, उम्मेद सिंह, दयाल सिंह, दिनेश नाथ,, चंदन, किशन, त्रिलोक आदि का कहना है कि रोजमर्रा के काम के साथ मरीजों और बुजुर्गों को डोली पर ढोने का अतिरिक्त कार्य भी गांव के युवाओं को करना पड़ता है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग हो रही है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव के पैदल रास्ते भी खराब हैं। डोली पर मरीजों को ले जाने में काफी दिक्कत होती है।

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केस-1
कफलानी निवासी रतन सिंह (58) लंबे समय से बीमार हैं। उनका हल्द्वानी के अस्पताल से इलाज चल रहा है। उनका भोजन भी नाक में लगी एनसी ट्यूब के सहारे चलता है। बीएसएफ से सेवानिवृत रतन सिंह को हर पखवाड़े जांच के लिए हल्द्वानी जाना पड़ता है। गांव से उन्हें डोली से सड़क तक लाना पड़ता है। सोमवार को भी ग्रामीणों ने उन्हें डोली से सड़क तक पहुंचाया।

केस-2
शनिवार को गांव की खष्टी देवी (65) को अचानक पेट में दर्द होने लगा। उन्हें पथरी की शिकायत थी। तेज दर्द होने के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ थीं। ग्रामीणों ने उन्हें भी डोली की मदद से गांव से सड़क तक पहुंचाया। इस दौरान वह दर्द से कराह रही थी। उनके हिलने-डुलने से ढलान वाले रास्ते पर डोली उठाकर चल रहे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर आने के बाद उन्हें वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
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कफलानी तोक के लिए तीन किमी सड़क की सर्वे हो चुकी है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
- अमित कुमार पटेल ईई लोनिवि कपकोट

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