दुबई में उत्तराखंड एसोसिएशन के सालाना समारोह में कुमाउंनी, गढ़वाली लोक कलाकारों ने समा बांध दिया। गढ़वाली के बटी जाली दौणि सरूपा बटी जाली और कुमाउंनी के ओ मेरी धनुली धना धन तेरो जोबना आदि गीतों पर हाल में बैठे प्रवासी थिरक उठे। दुबई में उत्तराखंड की संस्कृति सजीव हो उठी।
दुबई स्थित काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया के सभागार में उत्तराखंड एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र कोरंगा ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि भारतीय संस्कृति काउंसिल की अध्यक्ष दीपा जैन थी। लोकगायक शिव दत्त पंत ने नंदा राजजात गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।
मंगलेश डंगवाल दीपा पंत ने गढ़वाली का बटी जाली दौणि सरूपा बटी जाली, युगल गीत पेश किया। वहीं शिव दत्त पंत, दीपा पंत ने कुमाउंनी का ओ मेरी धनुली धना, धन तेरो जोबना, पधानू कौ लोंड गोपाला हाथ में त्यर रुमाला, गीत की प्रस्तुति दी।
माया उपाध्याय ने चर्चित गीत हाई काकड़ी झील मां, लूण पिसो सील मां, मोहना तू बसी रैछे म्यरा दिल मां, गीत पेश करके लोगों की वाह वाही लूटी। मोहन जोशी के बांसुरी वादन, विनोद चौहान के आर्गन, सत्येंद्र के ढोलक की थाप को भी सराहा गया। आरुषि पोखरियाल, प्रवासी कलाकारों के भी कार्यक्रम हुए।
संयुक्त अरब अमीरात के इस शहर में रात भर पहाड़ सजीव हो उठा। पहाड़ी गीत, संगीत की धुन पर प्रवासी झूम उठे। अपने स्थानों पर खड़े होकर नाचने लगे। समापन पर अध्यक्ष देवेंद्र कोरंगा ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। वहां एसोसिएशन के संजय थापा, दीपक धामी, अतुल तिवारी, आशीष जुयाल आदि भी उपस्थित थे।