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डॉक्टर, पटवारी पर कार्रवाई की संस्तुति

Tue, 09 Jun 2015 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
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क्षत विक्षत शव का वैज्ञानिक परीक्षण कराए बगैर मात्र पर्स, जूतों और वस्त्रों के आधार पर शिनाख्त, पोस्टमार्टम करने के मामले में जिला सत्र न्यायाधीश डा. जीके शर्मा ने राजस्व पुलिस उप निरीक्षक और चिकित्सक के खिलाफ उच्चाधिकारियों से अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है।
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गरुड़ के मंगलटा निवासी 47 वर्षीय खड़क सिंह कौसानी स्थित चाय बागान में काम करते थे। पिछले साल एक जुुुुलाई को घर जाते समय वह लापता हो गए। चार जुलाई को उनके भाई मंगल सिंह ने राजस्व पुलिस क्षेत्र पिंगलों में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पांच जुलाई को पिंगलो के खड़ी गधेरा में एक क्षत विक्षत शव मिला।

जिसे जानवरोें ने इस कदर नोचा था कि उसकी पहचान कर पाना असंभव था। हालांकि शव के पास से गुमशुदा खड़क सिंह का पर्स, जूते और कपड़े मिले थे। जिसके आधार पर शव की शिनाख्त खड़क सिंह के तौर पर की गई।
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पिंगलों के राजस्व पुलिस उपनिरीक्षक ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया।  इस प्रक्रिया में डाक्टर ने भी शव खड़क सिंह का ही मानकर ही पोस्टमार्टम किया। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने पड़ोस के पांच लोगों के खिलाफ हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।

मामला रेगुलर पुलिस को सौंप दिया गया। रेगुलर पुलिस ने खड़क सिंह की हत्या के आरोप में पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह मामला जिला सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा की अदालत में चला। जहां सबूतों के अभाव में यह साबित नहीं हो सका कि शव गुमशुदा खड़क सिंह का ही था।

परिजनों ने भी शिनाख्त की बात से इनकार कर दिया। जिला जज ने ठोस सबूताें और मृतक के शव की बरामदगी संबंधी तथ्यों के अभाव में पांचों आरोपियों को रिहा कर दिया। जज के अनुसार राजस्व पुलिस उप निरीक्षक ने बरामद शव का डीएनए परीक्षण नहीं करवाया।

पोस्टमार्टम के दौरान डाक्टर ने भी इन तथ्यों की अनदेखी करते हुए खड़क सिंह के नाम से ही पूरी कार्रवाई की। इससे हत्या जैसे संगीन मामले का पर्दाफाश नहीं हो सका।

जिला जज ने फैसले में कहा है कि  जिला अस्पताल के डाक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए फैसले की एक कापी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महा निदेशक को, और राजस्व पुलिस उपनिरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बागेश्वर के डीएम को भेजी जाए।
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