मौलेखाल (अल्मोड़ा)। पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। प्रसव पीड़ा से कराह रहीं 26 वर्षीय गर्भवती महिला को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ी। थैलीसैंण ब्लॉक के भरनौ गांव निवासी मीना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देघाट लेकर पहुंचे लेकिन वहां महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे भिकियासैंण सीएचसी रेफर कर दिया गया। गंभीर प्रसव पीड़ा के बीच परिजन उसे लेकर भिकियासैंण रवाना हुए जहां महिला ने बाद में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार को मीना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन पहले थैलीसैंण अस्पताल ले जाने की तैयारी में थे। बताया गया कि वहां महिला चिकित्सक के तबादले के बाद पद रिक्त होने के कारण परिजन उसे 108 एंबुलेंस से देघाट सीएचसी लेकर पहुंचे लेकिन देघाट में भी महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निराश होना पड़ा।
अस्पताल पहुंचने के समय इमरजेंसी में चिकित्सा प्रभारी डॉ. विश्वास और एक एएनएम मौजूद थे। परिजनों ने प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला का उपचार और प्रसव कराने का आग्रह किया लेकिन महिला चिकित्सक के उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे भिकियासैंण सीएचसी रेफर कर दिया गया।
परिजनों के मुताबिक मीना देवी बेहद दर्द में थीं और स्वयं चलने-फिरने की स्थिति में नहीं थीं। ऐसे में उन्हें दोबारा दूसरे अस्पताल ले जाना परिजनों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। भिकियासैंण सीएचसी पहुंचने के बाद मीना देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। मां और नवजात के स्वस्थ होने से परिजनों ने राहत की सांस ली लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।