बागेश्वर। जिले के प्राथमिक शिक्षा विभाग में हाल ही में संपन्न हुई शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों और विवादों के बीच पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया की जांच होगी। डीएम अपूर्वा पांडेय ने सीईओ से जल्द विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
विगत दिनों शिक्षा विभाग की ओर से जारी की गई तबादला सूची के बाद से ही शिक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त था। प्रभावित शिक्षिकाओं और शिक्षकों ने स्थानांतरण प्रक्रिया में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के कड़े उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी को प्रत्यावेदन सौंपा था। अमर उजाला ने बीते सोमवार को पोर्टल से गायब हुए रिक्त स्कूल, शिक्षकों के तबादलों पर सवाल शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
उठ रहे ये सवाल
-शिक्षकों का आरोप है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़, पंद्रहपाली और द्यांगण जैसे स्कूलों को सार्वजनिक सूची में तो रिक्त दर्शाया गया, लेकिन आवेदन के समय पोर्टल पर विकल्प के रूप में प्रदर्शित ही नहीं किया गया।
-वरिष्ठ शिक्षकों को यह कहकर मनपसंद स्कूल नहीं दिए गए कि वहां छात्र संख्या 10 से कम है, जबकि दूसरी ओर कनिष्ठ (जूनियर) शिक्षकों को गरुड़ ब्लॉक के ऐसे स्कूलों में भेज दिया गया जहां छात्र संख्या नौ ही थी।
-पति-पत्नी व गंभीर बीमारी श्रेणी की उपेक्षा: धारा 13(3) के तहत पति-पत्नी श्रेणी और धारा 13(4) के तहत गंभीर बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर किए गए आवेदनों में भी पात्र और वरिष्ठ आवेदकों के पहले-दूसरे विकल्पों को दरकिनार कर कनिष्ठों को लाभ दिए जाने के गंभीर आरोप हैं।
कोट
प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण और पोर्टल में विसंगतियों को लेकर एक शिक्षिका का प्रत्यावेदन प्राप्त हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीईओ को पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि नियमों के उल्लंघन या किसी भी स्तर पर अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -अपूर्वा पांडेय, डीएम, बागेश्वर