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सीवर लाइन नहीं होने से सरयू में समा रही गंदगी

Sat, 02 Dec 2017 10:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
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सरयू में समाती नाले की गंदगी।  - फोटो : amar ujala
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सरयू नदी को गंगा के समान धार्मिक महत्व का समझा गया है। पुराणों में इस नदी का उल्लेख मोक्षदायिनी नदी के रूप में होने से बागेश्वर को कुमाऊं की काशी कहा जाता है। बावजूद इसके हरिद्वार या अन्य धार्मिक महत्व के शहरों की तरह आज तक कुमाऊं की इस काशी के विकास का खाका नहीं खींचा जा सका है। सीवरेज सिस्टम नहीं होने से शहर का सीवर तक सरयू नदी में बहाया जा रहा है। 
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बागेश्वर के सरयू और गोमती नदियों के संगम स्थल की गिनती देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में होती है। बागनाथ मंदिर के पास सरमूल नामक उद्गम स्थल से बहकर आने वाली सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम स्थल पर स्नान का महत्व भी गंगा में डुबकी लगाने के बराबर माना गया है। बावजूद इसके आज तक इसका विकास किसी भी धार्मिक महत्व के शहरों की तर्ज पर नहीं हो सका। 

बागेश्वर शहर में सीवर लाइन की सुविधा नहीं है। कई घरों और होटलों की गंदगी सीधे सरयू में प्रवाहित हो रही है। सरयू के साथ ही यहां से होकर बहने वाली गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सीवर लाइन निर्माण को लेकर एक दशक पूर्व बनाया गया प्रस्ताव सर्वे से आगे नहीं बढ़ सका।
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प्राधिकरण घोषित होने के बाद भी अनियंत्रित निर्माण कार्य हो रहे हैं। अधिकांश सार्वजनिक स्थल और नेशनल हाइवे तक अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। हाल ही में जिले के दौरे पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बागेश्वर शहर में सीवर लाइन के निर्माण की घोषणा की है। इससे सीवर लाइन के निर्माण की उम्मीद जगी है। हालांकि यह बात अलग है कि बागेश्वर जिले में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा विभिन्न विकास कार्यों को लेकर की गई अधिकांश घोषणाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं। 

मुख्यमंत्री की ओर से जो घोषणाएं की गई हैं, उनकी सूची घोषणा सेल में भेज दी गई हैं। सीवर लाइन के निर्माण की घोषणा भी इनमें शामिल है। इस संबंध में जो भी दिशा निर्देश शासन से आएंगे, उसी अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। बागेश्वर में सीवर लाइन के निर्माण को लेकर हर संभव प्रयास किए जाएंगे। सरयू और गोमती नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
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- रंजना राजगुरु, जिलाधिकारी, बागेश्वर। 
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