प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के नारे को छह माह बीत गए। स्वच्छता को लेकर शुरुआती दौर में जिस तेजी से गतिविधियां हुईं। उसी रफ्तार से मंद भी पड़ गईं। परिणामस्वरूप आज भी गंदगी की समस्या बनी हुई है।
अब सफाई के लिए हाथों में झाडू़ लेकर निकलने वाले झुंड गायब हो गए हैं। कई सगठनों ने तो आरंभ में हर सप्ताह अभियान चलाने की घोषणाएं तक कर दी थीं। अब इस तरह के अभियान कुछ स्कूलों, गांवों और एनजीओ के कार्यक्रमों की खानापूरी तक सिमटकर रह गए हैं।
सरयू और गोमती के किनारे सुबह-सवेरे शौच के लिए बैठे लोगों की कतारें हों अथवा जिले भर में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालने की समस्या हो, सभी पहले की तरह है।