बागेश्वर। भारत सरकार का डिजीटल इंडिया का नारा बागेश्वर के हिमालयी क्षेत्र से सटे लीती, शामा क्षेत्र के लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। वहां के लोगों को आज भी मोबाइल और इंटनेट के सिग्नल के लिए ऊंची पहाड़ियों में चढ़ना पड़ता है। वर्तमान में स्कूल बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है।
विद्यार्थियों को ऊंचाई वाले स्थानों में पहुंचकर इंटरनेट के सिग्नल ढूंढने पड़ रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र से सटे लीती, शामा, गोगिना में संचार सेवा ही काफी लचर है। बमुश्किल मोबाइल फोन पर बात हो पाती है। इंटरनेट तो इन इलाकों के लोगों के लिए एक सपना ही है। इंटरनेट सेवा पुख्ता न होने के कारण लोग डिजीटलीकरण का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इन इलाकों के लोग फेसबुक, व्हाट्सएप वगैरह नहीं चला पाते।
कोरोना संक्रमण काल में विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। लीती, शामा क्षेत्र के तमाम बच्चे बागेश्वर के साथ ही अन्य शहरों में पढ़ाई करते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को गांव से काफी दूर ऊंची पहाड़ियों अथवा मुख्य सड़क में ऊंचाई वाले स्थानों में जाना पढ़ता है। वहां घंटों बैठकर विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई में हिस्सा लेते हैं।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी का कहना है कि इलाके के लोग इंटरनेट सेवा न मिलने से बेहद परेशान हैं। मोदी सरकार डिजीटल इंडिया की बात करती है। अब प्रदेश सरकार गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की बात कर रही है लेकिन हकीकत बेहद खराब है। उन्होंने लीती, शामा क्षेत्र में इंटरनेट सेवा पुख्ता करने की मांग की है।