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15 साल बाद भी शहीद विनोद जोशी के नाम नहीं हो सकी सड़क 

Tue, 04 Oct 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कपकोट (बागेश्वर)।
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बागेश्वर में शहीद को नहीं मिला सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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कपकोट (बागेश्वर)। पोथिंग गांव निवासी सैनिक विनोद कुमार जोशी 15 साल पहले आज ही के दिन देश की सीमा पर शहीद हुए थे। तब सरकार ने चीराबगड़-पोथिंग सड़क का नाम जोशी के नाम रखने और मार्ग में गेट बनाने की घोषणा की थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस घोषणा के पूरी न होने से शहीद परिवार आहत है। उन्होंने प्रदेश शासन से घोषणा को शीघ्र मूर्तरूप देने की मांग की है। 
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देश के सच्चे सपूत विनोद कुमार का जन्म 10 जून 1981 को पोथिंग गांव निवासी दिवंगत पूर्व सैनिक केवलानंद जोशी के घर हुआ था। उनमें बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा था। वह सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करना चाहते थेे। वर्ष 1998 में इंटर की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1999 में वह तीन कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हो गए। एक साल बाद पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध छेड़ दिया।

प्रशिक्षण समाप्त के बाद उनकी जम्मू में पोस्टिंग हो गई। पांच अक्तूबर 2001 को जम्मूूूू कश्मीर के पुंछ सुरनकोट में वह घुसपैठियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। शहीद विनोद की माता का उनके सेना में भर्ती में होने से पहले ही निधन हो गया था। विनोद अविवाहित थे। घर में उनके छोटे भाई चंद्रप्रकाश जोशी का परिवार रहता है।
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उनका कहना है कि बड़े भाई तो देश के लिए ही जन्मे उनके शहीद होने का तो गांव अपने को गौरवान्वित करता है, लेकिन शहीद भाई के नाम पर की गई घोषणा के पूरी न होने का हर किसी को मलाल है। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानी का हर किसी को सम्मान करना चाहिए।

वह कहते हैं कि गांव को जोड़ने वाली सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने और प्रवेश द्वार बनाने की एक साल पहले घोषणा हुई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। ग्रामीणों ने शासन से सरकारी घोषणा शीघ्र पूरी करने की मांग की है।
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