40 साल में दस लाख पौधे रोपित हो चुके हैं देवकी लघु वाटिका के जरिेये
देवकी लघु वाटिका ने एक करोड़ पौधों को पेड़ बनाने का रखा है लक्ष्य
बागेश्वर। पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान दे रही देवकी लघु वाटिका की संस्थापक 78 वर्षीय देवकी देवी मलड़ा को सात मार्च को राज्यपाल लेफ्टीनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रि.) देहरादून राजभवन में सम्मानित करेंगे। राजभवन से मलड़ा को आमंत्रण मिल गया है।
पर्यावरण संरक्षण की ललक के साथ वर्ष 1984 में बागेश्वर नगर के मंडलसेरा में देवकी देवी मलड़ा ने देवकी लघु वाटिका की स्थापना की। उनके बेटे किशन सिंह मलड़ा की देखरेख में वाटिका का संचालन किया जाने लगा। वाटिका के माध्यम से हर साल हजारों पौधे रोपे जाने लगे और उनकी देखरेख की जाने लगी। अब तक वाटिका की ओर से 10 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। वाटिका ने एक करोड़ पौधों को पेड़ बनाने का लक्ष्य रखा है।
बगैर किसी राजकीय सहायता के संचालित वाटिका से सालभर लोगों को विभिन्न प्रजाति के निशुल्क पौधे रोपे जाते हैं। शोधार्थी शोध के लिए भी वाटिका से पौधे ले जाते हैं। वाटिका में आकर शोध भी करते हैं। वाटिका संचालक देवकी देवी मलड़ा ने बताया कि राजभवन से आमंत्रण मिल गया है। वे छह मार्च को दून रवाना होंगी।
दो जलस्रोत हो गए पुनर्जीवित
बागेश्वर। देवकी लघु वाटिका के प्रयास से मंडलसेरा और द्यौलाणी के सूख चुके जलस्रोत पुनर्जीवित हो चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे बेहतरीन काम के कारण वाटिका के संचालक किशन सिंह मलड़ा को नवंबर 2018 में उत्तराखंड की तत्कालीन राज्यपाल ने वृक्ष पुरुष की उपाधि दी थी।