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Bageshwar: देवीकुंड में मंदिर निर्माण की जांच कराने की मांग, दानपुर सेवा समिति ने दिया डीएम को ज्ञापन

Tue, 16 Jul 2024 04:11 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

बागेश्वर जिले में मल्ला दानपुर के सरयू और पिंडर घाटी की समस्याओं को लेकर दानपुर सेवा समिति के सदस्य डीएम से मिले। ग्रामीणों ने क्षेत्र की सड़क और संचार सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की।
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देवीकुंड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागेश्वर जिले में मल्ला दानपुर के सरयू और पिंडर घाटी की समस्याओं को लेकर दानपुर सेवा समिति के सदस्य डीएम से मिले। ग्रामीणों ने क्षेत्र की सड़क और संचार सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की। डीएम अनुराधा पाल को दिए ज्ञापन में समिति के सदस्यों ने कपकोट-कर्मी-बदियाकोट और सौग-पतियासार सड़क में सुधारीकरण करवाने, नव निर्मित उंगिया-सोराग, बदियाकोट-बोरबलड़ा, बदियाकोट-कुंवारी सड़कों के जगह-जगह ध्वस्त हो चुके हिस्सों का पुनर्निर्माण करवाने की मांग की।

उंगिया-सोराग सड़क पर पिंडर नदी में प्रस्तावित पुल बनवाने और पिंडर घाटी के सभी गांवों को संचार सुविधा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। वहां पर हीरा सिंह देवली, उच्चप सिंह देवली, महेश सिंह दानू, दुर्गा सिंह पांडा आदि मौजूद रहे।

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देवीकुंड में मंदिर निर्माण की जांच कराने की मांग
दानपुर सेवा समिति और आदि बद्री मां भगवती मंदिर कमेटी बदियाकोट ने देवीकुंड में हुए मंदिर निर्माण की जांच की मांग की है। डीएम को ज्ञापन देकर ग्रामीणों ने कहा कि देवीकुंड और आदि बद्री मां भगवती मंदिर का पौराणिक संबंध है। वर्तमान में देवीकुंड में बिना अनुमति के मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर बनाने वाले योगी ने कुंड में स्नान करते हुई फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर क्षेत्र के लोगों की आस्था से खिलवाड़ किया है। ग्रामीणों ने डीएम से जनभावनाओं को देखते हुए इस प्रकरण की जांच करने और वहां चल रहे मानवीय क्रियाकलाप तत्काल बंद करवाने की मांग की। 

बागेश्वर जिला मुख्यालय से 100 किमी की दूरी पर सुंदरढूंगा क्षेत्र में स्थित देवीकुंड के पास बालयोगी स्वामी चैतन्य आकाश की प्रेरणा से मां आनंदेश्वरी दुर्गा मंदिर की नींव रखी गई। इसी दौरान स्वामी और अन्य लोगों की नजर देवीकुंड के ठीक सामने स्थित हिमशिखर पर पड़ी। लोगों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। शिखर पर सनातन संस्कृति का शुभ चिह्न स्वास्तिक बना हुआ था जो शिखर पर बर्फ पिघलने के कारण स्पष्ट दिखाई दे रहा था। आज तक स्वास्तिक पर्वत की ओर किसी का ध्यान नहीं गया था। पर्वत अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है।

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हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार स्वास्तिक को मंगल करने वाला और भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। स्वास्तिक की की दोनों रेखाएं भगवान गणेश की पत्नी रिद्धि और सिद्धि को दर्शाती हैं। इसे संपन्नता, समृद्धि और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक स्वास्तिक यंत्र है और ॐ मंत्र है। 

निर्जन क्षेत्र में है स्वास्तिक पर्वत
सुंदरढूंगा घाटी के हिमशिखर पर स्थित स्वास्तिक पर्वत बेहद निर्जन क्षेत्र है जो अधिकतर बर्फ से ढका रहता है। वाछम निवासी चंदन सिंह दानू, पोथिंग निवासी विनोद सिंह गढ़िया बताते हैं कि गर्मी और बरसात के दौरान वहां सिर्फ अनवाल (चरवाहे) के अलावा कोई नहीं जाता। इलाका जन शून्य होने के कारण स्वास्तिक पर्वत लोगों के नजरों से अब तक दूर रहा।

 

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