बागेश्वर। बागेश्वर जिले के कई रूटों में चीड़ के पेड़ मौत बनकर खड़े हैं। तेज हवा चलने पर यह पेड़ गिरते रहते हैं। ऐसे में हादसों का खतरा बना रहता है लेकिन खतरा बने इन पेड़ों को काटा नहीं गया है। बागेश्वर जिले के कांडा, ताकुला रूट में सड़कों के किनारे चीड़ के विशाल पेड़ हैं। इनमें से अधिकांश पेड़ लीसा निकालने के बाद आग लगने के कारण खोखले हो चुके हैं।
तेज हवा चलने पर यह पेड़ गिरते रहते हैं। कांडा रूट में चीड़ के पेड़ आए दिन सड़कों पर गिरते रहते हैं। बागेश्वर से कमेड़ीदेवी तक सैकड़ों पेड़ सड़क के नीचे, ऊपर खतरा बनकर खड़े हैं। ऐसे में हर समय वाहन संचालन, राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा है। कांडा रूट में वाहनों की काफी आवाजाही रहती है।
कौसानी से चौकोड़ी के लिए दिन-रात पर्यटकों के वाहनों का संचालन होता रहता है लेकिन सड़कों के किनारे खड़े इन पेड़ों के कारण दुर्घटना का खतरा है। यही हाल बागेश्वर-ताकुला रूट में भी है। पिछले दिनों चले तेज अंधड़ से सैकड़ों पेड़ गिरने के बाद भी इस रूट पर भी चीड़ के विशालकाय पेड़ धराशायी होने की कगार पर हैं। बागेश्वर से कौसानी, कपकोट, रीमा लाइन में भी कुछ स्थानों पर चीड़ के पेड़ खतरा बनकर खड़े हैं, लेकिन वन विभाग ने खतरा बने इन पेड़ों को हटाने के लिए कोई योजना नहीं बनाई है।