अब सभी सरकारी कार्यालयों की दीवारों पर ऐपण और झुमैलो नृत्य के चित्र नजर आएंगे। सरकारी भोज में कम से कम दो पारंपरिक व्यंजन शामिल करने भी जरूरी होंगे। प्रदेश की लोक कला एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए प्रदेश सरकार पूरे राज्य में यह मुहिम चला रही है। जल्द ही इसका असर यहां के सरकारी कार्यालयों पर दिखने लगेगा।
मालूम हो कि उत्तराखंड राज्य की लोक कला, संस्कृति और परंपराएं अत्यंत समृद्ध रही हैं। लेकिन आधुनिकता के प्रभाव के कारण यह परंपराएं विलुप्त हो रही हैं। यहां तक कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं के बारे में कोई खास जानकारी तक नहीं है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब राज्य की लोक कला और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं।
इसके तहत सभी सरकारी विभागों की दीवारों पर ऐपण और झुमैलो नृत्य के चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। इन चित्रों को या तो बाजार से खरीदना होगा या फिर स्थानीय कलाकारों के माध्यम से दीवारों पर बनवाना होगा।
इतना ही नहीं समय-समय पर आयोजित होने वाले सरकारी भोज में कम से कम दो पारंपरिक व्यंजन तो बनाने ही होंगे। इसके अलावा सरकारी जलपान के कार्यक्रमों में पारंपरिक व्यंजनों बड़े पकौड़े, गुलगुले, मालपुवे, स्वाल और सिंघल को भी अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।
डीएम भूपाल सिंह मनराल बताते हैं कि प्रदेश की लोक कला संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार की ओर से इस तरह के निर्देश मिले हैं। उनकी ओर से सभी विभागों के अधिकारियों को इसका अनुपालन करने के निर्देश दे दिए गए हैं। लोक कला व संस्कृति के संरक्षण के लिए इन निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाएगा।