बागेश्वर। बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में काली कुमाऊं (लोहाघाट-चंपावत) के लोहे से बने उत्पादों की प्राचीन काल से धमक रहती आई है। इस बार भी काली कुमाऊं क्षेत्र से पांच उद्यमी लोहे के हाथ से बने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। लोग हाथ से बने लोहे के उत्पादों को हाथोंहाथ ले रहे हैं।
उत्तरायणी के मेले में काली कुमाऊं के पाटी (लोहाघाट) क्षेत्र के लौह उत्पादों की भरमार है। नगर के दुग बाजार में लोहे के उत्पादों की पांच दुकानें लगी हुई हैं। पाटी से लोहे के उत्पाद लेकर पहुंचे सुभाष कुमार और राजेश कुमार ने बताया की तीन पीढि़यों से उनका परिवार उत्तरायणी के मेले में लोहे के उत्पाद लेकर आ रहा है। अतीत में उनके दादा बाली राम लोहे के उत्पाद लेकर आते थे। उसके बाद उनके ताऊ नारायण राम और उनके पिता जीवन राम लोहे के उत्पाद लेकर आ रहे हैं। लौह सामग्री उत्पादक सुभाष कुमार मानते हैं कि बाजार में मशीन से बने लोहे के उत्पाद उपलब्ध होने से धंधा कुछ मंदा हुआ है।
कढ़ाही, भदेले, डाड़ू, पन्यौला आदि की भरमार
बागेश्वर। काली कुमाऊं के लोहे के उत्पादों की भरमार है। लौह उत्पादों की दुकान पर कढ़ाही, भदेले, डाड़ू, पन्यौला, तवा, झांजर के साथ ही हर तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं।